कमिश्नर को मिला था करप्शन जांच कमेटी ने दी क्लीनचिट

On Date : 12 August, 2017, 12:45 PM
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प्रदेश टुडे संवाददाता, भोपाल। नगर निगम कमिश्नर छबि भारद्वाज ने ट्रांसपोर्ट शाखा में खुद करप्शन पकड़ा था और प्रभारी आरएस परमार को हटाया गया था। इसके लिए एक जांच कमेटी बनाई गई थी, लेकिन जांच कमेटी को कोई अधिकारी-कर्मचारी दोषी नहीं मिला। यानि कि एक तरह से सभी को क्लीनचिट देने की तैयारी है।  सवाल उठ रहा है कि क्या जांच कमेटी ने मिलीभगत की। हालांकि कमिश्नर ने इस रिपोर्ट को नहीं माना है। प्रदेश टुडे ने 25 जुलाई को प्रकाशित अंक में ही इस मिलीभगत का अंदेशा जताया था, जो कि सच साबित हुआ। अब पार्षदों की मांग है कि कमेटी पर ही कार्रवाई होनी चाहिए।

अफसरों की आंखें बंद कमिश्नर ने फिर पकड़ी डीजल चोरी
नगर निगम में शुक्रवार को डीजल चोरी पकड़ी गई और 3 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया। सवाल यह उठ रहा है कि पूरी गड़बड़ी और करप्शन कमिश्नर ही पकड़ रही हैं, जबकि विभाग में अपर आयुक्त, उपायुक्त, इंजीनियर एवं अन्य अधिकारी भी है। क्या कारण है कि इन्हें करप्शन नहीं दिखता।


नहीं हुई FIR
गौरतलब है कि नगर निगम में हो रही इस डीजल चोरी की घटना की पहले निगम ने एफआईआर कराने की तैयारी की थी लेकिन बाद में अधिकारियों के विचार विमर्श के बाद इसको अपने ही स्तर पर जांच करने की बात पर जोर दिया गया। डीजल चोरों से सख्ती के पूछताछ के बाद उनको पुलिस के हवाले भी किया जा सकता है क्योंकि इसमें निगम के अधिकारियों की भी मिली भगत की आशंका है।

पहले से ही थी रिपोर्ट में गड़Þबड़ी की आशंका
चूंकि परिवहन शाखा में सालों से करोड़ों की गड़बड़ी हो रही है। इसलिए इसकी जांच में लीपापोती की आशंका पहले से ही थी। जिन अफसरों को जांच की मुख्य जवाबदारी दी गई थी, उनमें टेक्निल रूप से सिटी इंजीनियर जीएस सलूजा ही मुख्य थे। चूंकि सलूजा के कार्यकाल में बनाई सड़कें सहित अन्य निर्माण कार्य पहले से ही जांच के घेरे में है, इसलिए उनके हाथ से सही जांच हो पाए यह मुश्किल है।

आखिर जांच समिति को क्यों नहीं मिले दोषी
नगर निगम की गाड़ियों में डीजल की अधिक खपत के बाद निगमायुक्त छबि भारद्वाज ने अपर आयुक्त प्रदीप जैन, प्रोजेक्ट इंजीनियर जीएस सलूजा और सहायक आयुक्त सीबी मिश्रा की समिति बनाई थी। हैरानी की बात तो यह है कि समिति ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें उसने किसी को भी दोषी नहीं बताया गया था, जबकि कमिश्नर ने स्वयं ही इस विभाग में गड़बड़ी पकड़ी थी। यहां मनमाने तरीके से पार्ट्स की खरीदी की गई थी। लेकिन जांच कमेटी ने जब पूरा रिकार्ड खंगाला तो उसे गड़बड़िया तो मिली पर  किसी अधिकारी को दोषी नहीं पाया। इससे स्पष्ट है कि जांच कमेटी के अधिकारियों ने संबंधित शाखा के इंजीनियर और अन्य कर्मचारियों से मिलीभगत की। कमिश्नर ने फिलहाल इस रिपोर्ट को एक तरह से खारिज कर दिया है और दूसरे तरीके से अपनी जांच जारी रखी है। शुक्रवार को ही उन्होंने यहां डीजल चोरी पकड़ी।

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