कलेक्टरों की निगरानी फेल, कई जिलों में करोड़ों लैप्स

On Date : 13 October, 2017, 12:40 PM
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प्रसं, भोपाल। प्रदेश के विकास में हर साल केन्द्र और राज्य से भरपूर बजट उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन अफसरों की नाफरमानी और सुस्त चाल के कारण अरबों रुपए लैप्स हो रहे हैं। खासतौर पर अनुसूचित जाति और जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में विकास के नाम पर अफसरों की ढिलाई सामने आई है। बजट का उपयोग करा पाने में कई जिलों के कलेक्टरों का सुपर वॉच भी काम नहीं आया है। अनुसूचित जाति बस्ती विकास, अनुसूचित जाति मजरे टोलों का विद्युतिकरण और अनुसूचित जाति के कृषकों के कुओं तक बिजली लाइन विस्तार करने के लिए हर साल केंद्र और राज्य से बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले 16 सालों में एक बार भी अफसर प्रावधानित राशि शत-प्रतिशत व्यय नहीं कर पाएं हैं। पिछले साल मजरे टोलों के विद्युतिकरण के लिए 49 करोड़ की राशि राज्य द्वारा प्रावधानित की गई लेकिन विभाग महज 8 करोड़ ही खर्च कर पाया।
166 करोड़ बचा रहा
अजा बस्ती विकास के लिए वर्ष 2004 से 2017 तक के लिए राज्य पोषित योजनाओं के अन्तर्गत अनुसूचित जाति बस्ती विकास के लिए 73 हजार 365 लाख रुपए राशि का प्रावधान किया गया। इसमें 56 हजार 754 लाख रुपए की राशि ही खर्च हो पाई है। पिछले पांच साल से राशि खर्च करने का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है।
CS ने कहा था अफसरों के उपयोग में आते हैं बकरे
मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह विकास कार्य की समीक्षा के दौरान तंज कसा था कि बकरी पालन के लिए हितग्राहियों को राशि तो उपलब्ध करा दी जाती है लेकिन कोई हितग्राही छह माह से ज्यादा समय तक पालन नहीं कर पाता क्योंकि बकरे एक-एक करके अफसरों के उपयोग में आ जाते हैं। अफसरों के इस शौक पर कड़ी निगरानी की जरूरत है।

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