भ्रष्ट जिलों में भिंड टॉप पर,भोपाल समेत 16 जिलों में जीरो टॉलरेंस

On Date : 07 December, 2017, 12:57 PM
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विकास तिवारी, भोपाल
मध्यप्रदेश में लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू प्रकरणों, सीएम हेल्पलाइन के मामलों, विभागीय जांच, नोटिस जैसी कार्यवाहियों के आधार पर भ्रष्ट जिलों की रैंकिंग में भिंड कलेक्टर टी इलैया राजा का जिला टॉप पर है। जबकि भोपाल, छतरपुर समेत सोलह जिले ऐसे पाए गए है जहां जीरो रैकिंग हुई है याने यहां कोई भ्रष्टाचार नहीं है। रैकिंग की इस प्रक्रिया पर कलेक्टरों द्वारा सवाल खड़े किए जाने के बाद सरकार तीन माह के आंकड़े इकट्ठे हो जाने के बाद भी अब तक इसकी सार्वजनिक घोषणा नहीं कर पाई है। राज्य सरकार ने सभी कलेक्टरों को भ्रष्टाचार की रैंकिंग करने के लिए एक फार्मूला दिया था। तीन प्रपत्र कलेक्टरों को हर माह चार तारीख तक भेजने को कहा गया था। चार अक्टूबर को सबसे पहले भोपाल, छतरपुर जिलों ने अपनी रिपोर्ट भेजी थी। जीएडी के एसीएस प्रभांशु कमल के बार-बार रिमाइंडर के बाद जिलों से रिपोर्ट आना शुरु हुई। सामान्य प्रशासन विभाग के पास अब तक तीन महीनों की कलेक्टरों की रिपोर्ट आ चुकी है। चार अक्टूबर को पहली रिपोर्ट भेजने की समयसीमा तय की गई थी। पहले महीने की रिपोर्ट में जिले में भ्रष्ट और लापरवाह अफसरों के खिलाफ की गई कार्यवाही के आधार पर भिंड जिला इस रैंकिंग में टॉप पर है। जबकि सोलह जिलों में जीरो अंक है, याने वहां बिलकुल भ्रष्टाचार नहीं हुआ। इनमें भोपाल भी शामिल है।
भ्रष्ट जिले तय करने की प्रक्रिया पर कलेक्टरों ने ही सवाल खड़े कर दिए है। जिस जिले में भ्रष्टों पर लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू ज्यादा कार्यवाही करे, सीएम हेल्पलाइन में ज्यादा मामले आए, लापरवाहों की विभागीय जांच, नोटिस ज्यादा जारी किए जाए वही जिला सबसे टॉप कैसे घोषित किया जा सकता है। कलेक्टरों का कहना है कि जिन जिलों ने भ्रष्ट और लापरवाहों पर ज्यादा कार्यवाही की उन्हें तो पुरस्कृत किया जाना चाहिए। भ्रष्ट जिले की रैंकिंग प्रक्रिया ही गलत है। कलेक्टरों द्वारा सवाल खड़े किए जाने के बाद सरकार इस रैंकिंग की सार्वज्निक घोषणा करने से पीछे हट गई है।
...तो अफसर हो सकते हैं नाराज
राज्य सरकार ने भ्रष्ट जिलों की रैंकिंग करने का जो फार्मूला तय किया है उसमें हर माह कोई न कोई जिला टाप पर रहना तय है। यदि एक-एक कर अलग-अलग जिले टॉप पर आ गए और सार्वजनिक घोषणा की गई तो उन जिलों की किरकिरी होगी। ऐसे में अफसर नाराज होंगे। सरकार अब कलेक्टरों को नाराज नहीं करना चाहती है। इसलिए भी इसकी घोषणा से सरकार पीछे हट रही है।

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