दूध सोसायटी में 19 लाख का घोटाला

On Date : 06 November, 2017, 9:51 PM
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इंदौर। इंदौर दुग्धसंघ से जुड़ी एक दुग्ध उत्पादक सहकारी संस्था में 19 लाख रुपए से अधिक का घोटाला सामने आया है। इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के बिरगोदा गांव की दुग्ध उत्पादक सहकारी संस्था के जिम्मेदार घी और पशु आहार का पैसा खा गए। उन्होंने कैशबुक और बैलेंस शीट में भी हेराफेरी कर संस्था का पैसा हड़प कर लिया। जो पैसा संस्था के बैंक खाते में जमा होना था, वह भी उन्होंने अपने पास रख लिया। नियम नहीं होने के बावजूद संचालक मंडल के सदस्यों ने संस्था से अग्रिम राशि निकाल ली।

सहकारिता विभाग द्वारा हाल ही में सोसायटी का आॅडिट कराने पर यह धांधली उजागर हुई। आॅडिट आॅफिसर आईसी वर्मा की रिपोर्ट के बाद सहायक आयुक्त सुरेश सांवले ने संस्था के सचिव, संचालकों और इंदौर दुग्ध संघ के जिम्मेदार सुपरवाइजरों को गबन की गई राशि की वसूली के लिए नोटिस जारी किया है। इनमें सोसायटी के सचिव ओमप्रकाश कल्याणसिंह दयाल, अध्यक्ष रामसिंह भैरूसिंह सोनगरा, कैलाश जाधवराव, सरदारसिंह ठाकुर, सत्यनारायण पंवार, बद्रीलाल पद्मसिंह पंवार, रामेश्वर डौढ़, अंबाराम जगन्नाथ नकुम और लीलाबाई रंजीतसिंह ठाकुर शामिल हैं। इनके अलावा दुग्ध संघ के क्षेत्रीय प्रबंधक ओपीएम सोनी और एक्सटेंशन सुपरवाइजर आरएस गुप्ता की लापरवाही भी सामने आ रही है। इन दोनों अधिकारियों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।

ऐसे हुआ घोटाला : जिम्मेदारों की जेब में गई राशि
सोसायटी का लेखा-जोखा देखने पर पाया गया कि वित्तीय वर्ष के अंत में अंतिम नकद सिल्लक, पशु आहार और घी के स्टॉक की बिक्री को बैंक खाते में जमा न करके निजी उपयोग किया गया। अप्रैल, 2016 की शुरूआत में प्रारंभिक सिल्लक, पशु आहार और घी के प्रारंभिक स्टॉक की राशि मिलाकर 3 लाख 82 हजार 57 रुपए बताई गई, लेकिन वास्तव में ये स्टॉक था ही नहीं। आॅडिट के दौरान अगस्त 2017 में भौतिक सत्यापन किया गया तो इस राशि में और इजाफा हो गया और अंतिम नकदी 8 लाख 99 हजार 538 रुपए बताई गई। यह राशि कागजों में बताई गई, सोसायटी में थी ही नहीं। आॅडिट आॅफिसर ने मौके पर इसका पंचनामा भी बनाया। संस्था में यह राशि जमा करने की मुख्य जिम्मेदारी संस्था के पूर्व सचिव कल्याणसिंह और अध्यक्ष की थी, लेकिन जमा नहीं की गई। कल्याणसिंह के बेटे और वर्तमान सचिव ओमप्रकाश ने भी पंचनामे पर हस्ताक्षर कर यह स्वीकार किया है। वर्तमान सचिव को अवसर देने के बाद भी उन्होंने यह राशि जमा नहीं की। इससे संस्था को 18 प्रतिशत ब्याज सहित 10 लाख 52 हजार 538 रुपए का नुकसान हुआ। संस्था के सचिव, सुपरवाइजर और संचालक मंडल पर संस्था के संचालन, निरीक्षण और नियंत्रण की जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने संस्था के 5.73 लाख रुपए निकालकर उसे सदस्य अग्रिम का नाम दे दिया। इसका कोई लेखा-जोखा भी सचिव पेश नहीं कर पाए। संस्था के पर्यवेक्षक ने कैशबुक में भी यह लिखा है। इस तरह 5.73 लाख रुपए में ब्याज की राशि मिलाकर 8 लाख 30 हजार 850 रुपए सचिव, क्षेत्रीय सुपरवाइजर, सुपरवाइजर और सभी संचालकों से वसूलने के लिए लिखा गया है। संस्था के कर्मचारियों व पदाधिकारियों से 15 हजार रुपए की राशि लेना लंबे समय से निकल रहा है, लेकिन रिकॉर्ड में यह कहीं नहीं है कि यह राशि किसे और क्यों दी गई थी। संस्था में ऋण अग्रिम देने का कोई प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद अध्यक्ष को 10 हजार रुपए अग्रिम और कर्मचारी अग्रिम के रूप में 20 हजार रुपए का भुगतान किया गया है।

वसूलेंगे राशि
बिरगोदा सोसायटी में हुए गबन की राशि की वसूली की जाएगी। दुग्ध संघ के सुपरवाइजरों की लापरवाही पर सीईओ को भी नोटिस भेजा है।
सुरेश सांवले, सहायक आयुक्त, सहकारिता

गड़बड़ी हुई तो केस दर्ज कराएंगे
सोसायटी में कोई अनियमितता हुई है तो प्रकरण दर्ज कराएंगे। सोसायटी ने कोई कदम नहीं उठाया तो हमारे सुपरवाइजर इसमें कार्रवाई करेंगे। मैं इस मामले को दिखवा रहा हूं।
एएन द्विवेदी, सीईओ,
इंदौर दुग्ध संघ

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