बच्चों की टीम भेजने में एक और लापरवाही आई सामने

On Date : 14 November, 2017, 4:41 PM
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डीईओ आॅफिस के कर्मचारियों ने चलाई मनमर्जी
प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर

राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता के प्री नेशनल कोचिंग कैंप के लिए छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव में स्कूली बालक-बालिकाओं की टीमों भेजी गर्इं है,उसमें एक के बाद एक लापरवाही का मामले सामने आ रहे हैं। जतिन मिश्रा नामक शिक्षक को अंडर 14 हॉकी टीम का कोच बना दिया गया,जबकि उनकी विशेषज्ञता बॉस्केटबॉम खेल की है। वहीं राहुल चौहान को अंडर 14 बॉस्केटबॉल टीम का कोच बना दिया,जबकि वे इसके लिए पात्र नहीं थे। उन्हें मैनेजर के तौर पर टीम के साथ जाना था। डीईओ आॅफिस के बाबुओं की मनमर्जी और लापरवाही के चलते ऐसा हुआ है। जिससे खूब किरकरी हो रही है। एक और चौंकाने वाला मामला पहले ही सामने आ चुका है,जिसमें अंडर 14 बालिकाओं की बॉस्केटबॉल टीम की कोच विजेता सिंह को बनाकर भेजा,लेकिन राजनंदगांव में कोच के तौर पर इनके स्थान पर अंग्रेजी की शिक्षिका रेनू बघेल का नाम भिजवा दिया गया। यह शिक्षिका कोच के लिए पात्र ही नहीं थी,फिर भी उन्हें भेजा गया।

कोरे कागज पर साइन करने छात्राओं पर दबाव बना रहे मैनेजर
लापरवाही और गड़बड़ी के मामले सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के वे लोग घबराए हुए हैं,जिन्होंने ऐसा किया है। इसमें डीईओ आॅफिस के कर्मचारी देवेन्द्र बाथम नाम सामने आ रहा है। वे खुद टीम के मैनेजर बनकर गए हैं। अपात्रों को कोच बनाने और अन्य शिकायतों को लेकर डीईटो ने उनकी खिंचाई कर दी है। इसलिए अब वे अपने बचान के लिए बॉस्केटबॉल टीम की छात्राओं पर कोरे कागज पर हस्ताक्षर करने दबाव डाल रहे हैं। इसकी शिकायत कुछ छात्राओं ने कोच विजेता सिंह से की तो उनकी देवेन्द्र बाथम से इस मसले पर बहस भी हुई।

इनका कहना है
मुझे अंडर 14 हॉकी टीम का कोच बना दिया है,जबकि मेरी बॉस्केटबॉल में विशेषज्ञता है। मेने इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
जतिन मिश्रा, कोच

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