सबसे अनोखे अटलजी...

On Date : 24 December, 2014, 2:59 PM
0 Comments
Share |

अटल बिहारी वाजपेयी के आलौकिक व्यक्तितव  से भारतीय राजनीति का कोई भी अंग अछूता नही है। एक कुशल राजनेता, प्रशासक, कूटनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता एवं ओजस्वी कवि के रूप में समस्त देशवासियों के हृदय में उनका शीर्षस्थ स्थान है। सन 1940 के दशक में राजनीति में प्रवेश कर उन्होंने अपने विनम्र आचरण, राष्ट्रवाद से ओत-प्रोत विचारधारा और जनकल्याण की भावना से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। वे 1998 से 2004 के बीच तीन मर्तबा प्रधानमंत्री रहे।  अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में जन्में और उनका मध्यप्रदेश से विशेष नाता रहा। राजनीति के शुरुआती दौर में ग्वालियर समेत मध्यप्रदेश को उन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने एक चुनाव विदिशा संसदीय क्षेत्र से भी लड़ा। अटल जी भले ही देश भर में लोकप्रिय हैं, मगर प्रदेशवासियों का उनसे स्नेह कुछ जुदा है, जैसे ही भारत रत्न की खबर आयी , मध्यप्रदेश झूम उठा.....

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर के मध्य वर्गीय ब्राह्मण परिवार में कृष्णा देवी और कृष्ण बिहारी वाजपेयी के घर 1924 में हुआ। उनके दादा पंडित श्याम लाल वाजपेयी उत्तर प्रदेश के बटेश्वर से ग्वालियर जा बसे थे। उनके पिता कवि और स्कूल मास्टर थे। वाजपेयी की पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर और ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से हुई। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में 75 फीसदी से ज्यादा अंक पाए थे।

जब भाई के साथ गए जेल!
राजनीति में उनका पहला कदम अगस्त 1942 में रखा गया, जब उन्हें और बड़े भाई प्रेम को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिन के लिए गिरफ्तार किया गया। 1951 में वह भारतीय जनसंघ से जुड़े। दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के साथ ही जनसंघ की जिम्मेदारी नौजवान वाजपेयी के कंधों पर आ गई। वह 1968 में इसके अध्यक्ष बने और इस दौरान वे जेल भी गए।

कमाल करने वाले इकलौते गैर-कांग्रेसी
अटल बिहारी वाजपेयी इकलौते ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। चार दशकों तक संसद का सदस्य रहे वाजपेयी देश के दसवें प्रधानमंत्री बने और उन्होंने 1998 से 2004 के बीच कार्यभार संभाला। वह नौ बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिए चुनकर आए। यह बात सही है कि अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के दिग्गज नेता थे, लेकिन विरोधी दलों के बीच भी उनका अपना खास मुकाम रहा। उनकी वाकपटुता की दुनिया कायल है। विपक्ष से लेकर आम आदमी भी उनके इस अदा का दीवाना रहा है।

पं. नेहरू ने कहा था एक दिन बनोगे ढट!
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक बार कहा था कि एक रोज अटल बिहारी वाजपेयी को देश का प्रधानमंत्री बनने का मौका जरूर मिलेगा। महात्मा रामचंद्र वीर की अमर कृति विजय पताका ने वाजपेयी की जिंदगी में काफी असर डाला। इसने उनके जीवन को नई दिशा देने का काम किया। इससे पहले 1997 में वह जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री बने और संयुक्त राष्ट्र संघ के एक सत्र में उन्होंने हिंदी में अपना भाषण दिया।

प्यार का नाम बापजी!
अटल बिहारी वाजपेयी को उनके करीबी दोस्त और रिश्तेदार बापजी कहते हैं। उनकी गोद ली हुई एक बेटी है, जिसका नाम नमिता है। उन्हें भारतीय संगीत और नृत्य में काफी दिलचस्पी है। वाजपेयी को कुदरत से भी काफी लगाव है और उन्हें छुट्टियां पहाड़ियों पर बिताना काफी अच्छा लगता है। हिमाचल प्रदेश में मनाली उनके आराम की पसंदीदा जगह रही है और वह ब्रेक के लिए अक्सर वहां जाया करते? थे।

बीमारी और अटल बिहारी!
चेस्ट इंफेक्शन और बुखार की वजह से वाजपेयी को फरवरी, 2009 में एम्स में भर्ती कराया गया। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन हालत में सुधार के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। खराब सेहत की वजह से 2009 लोकसभा चुनावों के प्रचार अभियान में वह हिस्सा नहीं ले सके, लेकिन उन्होंने पत्र लिखकर मतदाताओं से भाजपा का साथ देने की बात कही। अटल बिहारी वाजपेयी इन दिनों भले पैरालाइसिस की वजह से बोल न पाते हों। लेकिन वह इशारों से अपनी बात समझाने की कोशिश जरूर करते हैं। बीते बीस साल में वाजपेयी की 10 सर्जरी हुई हैं। कुछ महीने पहले तक वह नियमित फिजियोथेरेपी सेशन के बाद अक्सर टीवी देखा करते हैं। अभी भी वे अपना अधिकांश समय बिस्तर पर ही काटते हैं और सहायकों की मदद से चलते फिरते हैं।

विश्व में कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होते...
हमें यह समझ लेना है कि विश्व में स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होते, स्थायी केवल राष्ट्र के हित होते हैं, जिनके संरक्षण और संवर्धन के लिए हमें अपने पैरों पर खड़ा होना है। एक स्वचलित अर्थतंत्र की रचना और प्रतिकारक्षम-सैन्य शक्ति का निर्माण हमारे स्वतंत्र तथा स्वाभिमानपूर्ण जीवन की आवश्यक शर्तें हैं। जब तक ये शर्तें हम पूरी नहीं करते, हमें, परान्न पर पलने और परकियों के दबाव में चलने का लज्जाजनक दृश्य देखना होगा। (7 अक्टूबर 1968 जनसंघ सभा अधिवेशन इंदौर, में दिए गए अध्यक्षीय भाषण का अंश)

छुआछूत के अभिशाप को खत्म करने की करते रहे पहल
छूआछूत एक पाप है, छूआछूत एक अभिशाप है, अस्पृश्यता एक कलंक है। जब तक यह कलंक हमारे माथे से नहीं मिटेगा, हम दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़े नहीं हो सकते।
- मई 1968 में संसद में दिए भाषण का अंश

पिता के साथ कॉलेज में दाखिला!
हैरानी की बात है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने लॉ की पढ़ाई अपने पिता के साथ-साथ की। जब अटल ने कानपुर के डीएवी कॉलेज से लॉ में डिग्री करने की इच्छा जताई, तो उनके पिता ने कहा कि वह भी अपने पुत्र के साथ लीगल डिग्री करना चाहते हैं। कानून के छात्रों के रूप में वे दोनों एक साथ होस्टल के कमरे में रहते थे। इस बारे में सोचकर हैरानी हो सकती है कि पिता-पुत्र ने लॉ की पढ़ाई एक साथ, एक सत्र और एक हॉस्टल में रहते हुए पूरी की, लेकिन यह सच है।

नारी को नारी सा मिले सम्मान
मेरी मां ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी। रामायण और महाभारत की कथाएं मुझे सुनाती रहती थीं। गांव में जन्मी थीं। शादी होकर आयी तो लंबा सा घूंघट काढ़ती थीं। मैंने सुना है, उस समय तो मैंने देखा नहीं, मेरा पदार्पण तो बाद में हुआ है। लेकिन बच्चों को अच्छी तरह से पाला। घर में अच्छा वातावरण, अच्छे संस्कार बनाकर रखे। दोनों बातें आवश्यक हैं। हमारे यहां या तो हम एक सिरे से चले जाते हैं या दूसरे सिरे पर चले जाते हैं। नारी या तो देवी है या तो दासी है। अरे बीच में भी कोई जगह है, या नहीं है। इस बीच की जगह का लोप होता जा रहा है। हमें नारी को नारी रखना है। हमें नारी को कर्त्तव्य के प्रति जागरूक नारी के रूप् में देखना है। समाज और जीवनके हर क्षेत्र में बराबर की भागीदारी और केवल बराबर की भागीदारी नहीं, जहां बराबरी की भागीदारी से काम नहीं चलाा वहां विशेष अवसर, वहां रिजर्वेशन, वहां उनको प्रोत्साहन देना है। यह जो विषमता से भरा समाज है, यह बदलना चाहिए।
(08 मार्च 1999 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नई दिल्ली में दिए भाषण का अंश)

जेल की कहानी पर हंसते थे खूब!
वाजपेयी को उनकी वाकपटुता और करिश्माई व्यक्तित्व के लिए जाना जाता है। वह ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने का फैसला किया। साल 1942 में अगस्त क्रांति के दौरान पुलिसकर्मियों ने जिस बच्चे को पकड़कर जुवेनाइल होम में डाल दिया, वह अटल? बिहारी वाजपेयी थे। हालिया दिनों तक जब वाजपेयी अपनी पहली जेल यात्रा का जिक्र करते तो खिलखिलाकर हंस पड़ते थे।

मनमोहन ने बताया राजनीति का भीष्म पितामह
दिसंबर 2005 में वाजपेयी ने सक्रिय राजनीति से रिटायरमेंट का ऐलान किया। उन्होंने साफ किया कि वह अगले लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में भाजपा की रैली के दौरान उन्होंने कहा था कि लालकृष्ण आडवाणी और प्रमोद महाजन भाजपा के राम-लक्ष्मण होंगे। मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में एक भाषण के दौरान वाजपेयी को भारतीय राजनीति का भीष्म पितामाह करार दिया था।

आपकी राय

Name
Email
Comment
No comments post, Be first to post comments!

मसाला ख़बरें

एक्ट्रैस ने फेमस मैगजीन के लिए कराया हॉट फोटोशूट

मुंबई: बॉलीवुड एक्ट्रैस एवलिन शर्मा ने हाल ही में एक मशहूर मैगजीन के लिए फोटोशूट करवाया है। एवलिन ने...

मंदिरा बेदी ने वीकएंड पर पोस्ट की हॉट तस्वीर, इंस्टा पर मची खलबली

मुंबई: बॉलीवुड एक्ट्रैस मंदिरा बेदी सिनेमा और स्पोर्ट्स तक अपनी पुख्ता पहचान रखती है। हाल ही में मंदिरा...

प्रदेश टुडे मैगज़ीन

November, 2014

ब्लॉग

शेयर बाज़ार