गोरखपुर में बड़ा हादसा, ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से 48 मरीजों की मौत

On Date : 12 August, 2017, 9:49 AM
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गोरखपुर : उत्तर प्रदेश में गोरखपुर स्थित बाबा राघव दास मेडिकल कालेज के बाल रोग व मेडिसिन के वार्डों में कंपनी द्वारा ऑक्सीजन सप्लाई रोक दिए जाने से 48 घंटे में 48 मरीजों की मौत हो गई। मरने वालों में बाल रोग वार्ड के 30 मासूमों के अलावा मेडिसिन के वार्ड नंबर 14 में भर्ती 18 मरीज भी हैं।

हालांकि अस्पताल और जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी के आरोप को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि सभी मौतें गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों की हुई हैं। लखनऊ में राज्य सरकार के प्रवक्ता ने भी साफ किया है कि ऑक्सीजन की कमी से किसी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है। 11 अगस्त को सात मरीजों की ही विभिन्न चिकित्सीय कारणों से मृत्यु हुई है।

सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज के बाल रोग वार्ड में गुरुवार की रात 11.30 बजे से दूसरे दिन रात तक रुक-रुक कर ऑक्सीजन की सप्लाई हुई। पूरी रात मासूमों पर मौत का खतरा मंडराता रहा और अस्पताल प्रशासन चैन की नींद सोता रहा। हड़कंप तब मचा जब सुबह आईसीयू से शवों के निकलने का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद अफसर हरकत में आए और ऑक्सीजन की कमी दूर करने के प्रयास में जुट गये। इसी के साथ मामले पर पर्दा डालने की कोशिशें भी शुरू हो गईं।

प्रशासन भले ही ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की बात को नकार रहा हो, लेकिन अस्पताल प्रशासन के पत्राचार से एक दूसरी ही तस्वीर सामने आ रही है। अस्पताल में पुष्पा सेल्स कंपनी द्वारा लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई की जाती है। कंपनी ने एक अगस्त को ही पत्र लिखकर ऑक्सीजन की सप्लाई न करने की चेतावनी दे दी थी। साथ ही पिछले बकाया का भुगतान करने के बाद ही कंपनी ने ऑक्सीजन सप्लाई करने की बात कही थी।

दस अगस्त को लिक्विड ऑक्सीजन संयंत्र में लगे मीटर की रीडिंग सुबह 11 बजे ही 900 तक पहुंच चुकी थी जिससे गुरुवार की रात तक ही सप्लाई संभव थी। बाल रोग के विभागाध्यक्ष से अनुरोध किया गया कि मरीजों के हित को देखते हुए तत्काल ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित कराएं। इसके बावजूद अधिकारी बेपरवाह रहे। शाम को जब प्राचार्य डा. राजीव मिश्र से बात की गई तो उन्होंने बताया कि फैजाबाद से ऑक्सीजन सिलेंडर से लदी गाड़ी गुरुवार को शाम पांच बजे चल चुकी है और वह देर शाम तक पहुंच जाएगी। लेकिन, उन्होंने जो भी कहा उसका ठीक उलटा हुआ।

रात करीब आठ बजे सौ बेड के इंसेफ्लाइटिस वार्ड के सिलेंडर में ऑक्सीजन खत्म हो गई। आनन-फानन में वार्ड को लिक्विड ऑक्सीजन से जोड़ा गया जो थोड़ी ही बची थी। रात साढ़े ग्यारह बजते-बजते यह भी जवाब दे गया और मौत ने विभिन्न आईसीयू में भर्ती मरीजों को अपनी आगोश में लेना शुरू कर दिया।

जिलाधिकारी राजीव रौतेला ने बताया कि अपर आयुक्त प्रशासन के नेतृत्व में एडीएम सिटी, एडी हेल्थ, सीएमओ और सिटी मजिस्ट्रेट की पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति के सदस्यों से लिक्विड आक्सीजन की कमी होने के कारणों और सिलेंडर आक्सीजन की उपलब्धता की जांच को कहा गया है। समिति से शनिवार दोपहर 12 बजे तक रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह सच है कि मेडिकल कालेज में लिक्विड आक्सीजन खत्म हो गया था लेकिन 175 सिलेंडर आक्सीजन की उपलब्धता थी। किसी की मौत आक्सीजन की कमी के कारण नहीं हुई है। कंपनी का 70 लाख रुपए बकाया था, आज 22 लाख रुपए उनके खाते में भेज दिया गया है। बाल रोग विभाग में रोजाना आठ-दस मौतें होती हैं। परसों तक लिक्विड आक्सीजन की आपूर्ति हो जाएगी। व्यवस्था की जाएगी कि आगे से ऐसा न हो।

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