तोड़ दो उन भवन और टंकियों को

On Date : 12 May, 2017, 5:39 PM
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अप्रिय हादसों से बचाव के लिए  जर्जर भवनों पर  कार्रवाई जरूरी
प्रदेश टुडे संवाददाता, कटनी

खिरहनी ओवरब्रिज के गर्ग चौराहा छोर के नजदीक ध्वस्त होने की कगार पर खड़े जर्जर भवन पर हुई कार्रवाई निगम प्रशासन की ओर से शुरूआती कदम भर है। दरअसल समूचे शहर में दो दर्जन से अधिक और भी भवन हैं जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से वर्षों पहले ही खतरनाक चिन्हित किया जा चुका है। गनीमत है ये भवन अब भी खड़े हंै वर्ना किसी भी वक्त ये मौत का कारण बन सकते हैं। कार्रवई का आगाज हो ही गया है तो पूर्व से चिन्हित ऐसे सभी भवनों को तत्काल जमीदोंज किये जाने की दरकार है ताकि बारिश के दिनों में मंडराने वाले खतरे से निजात मिल सके। अभी महीनेभर के वक्त से विस्थापन की समस्या भी हल हो सकती है।  गौरतलब है कि पिछले साल ही स्टेशन रोड पर एक व्यवसायिक दुकान के ढहने से हुये हादसे के बाद प्रशासन द्वारा शहर के जर्जर मकानों की सूची तैयार कर ली थी। इन मकानों को गिराने के लिये तत्काल ही कार्रवाई होना था, लेकिन कार्रवाई टलती गई। ऐसे 28 भवनों को चिन्हित किया गया था। विलंब ही सही लेकिन अब जब एक बार कार्रवाई प्रारंभ हो  गई है, इसे  आगे भी बरकरार रखे जाने की दरकार है। जिससे हादसों को टाला जा सके।
हर वक्त हादसों का अंदेशा
जानकारी के अनुसार जर्जर मकानों को नियमानुसार गिराने और नया निर्माण कराने में सबसे बड़ी अड़चन यह है कि एक तो मकान मालिक को नये सिरे से निर्माण की अनुमति लेनी पड़ती है। इसके अलावा रोड से निर्धारित दूरी की जगह छोड़नी पड़ती है। ऐसी स्थिति में नये निर्माण की अनुमति लेने की बजाय मकान मालिक पुराने भवन की मरम्मत की अनुमति लेकर उसे दूरस्थ करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा कई पुराने जर्जर भवनों में मकान मालिक व किरायेदारों के बीच विवाद होने व कुछ मामले कोर्ट में होने से भी गिराने में अड़चन जा रही है। पूर्व में तत्कालीन निगमायुक्त द्वारा जर्जर चिन्हित मकानों को  तोड़ने की रूपरेखा भी बनाई थी।

भवन ही नही टंकिया भी जर्जर
शहरी क्षेत्र में केवल बूढ़े व वीरान पड़े भवनों से ही हादसे का अंदेशा नहीं है, बल्कि पानी की भारी भरकम टंकिया भी जर्जर हालत में होने की वजह से असुरिक्षत हैं। करीब दो वर्ष पहले सूबे की राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र में जर्जर टंकी गिरने से  हुये भीषण हादसे के बाद शासन लारा प्रदेशभर की टंकियो की जांच के आदेश दिये गये थे, जिसके बाद जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज की एक टीम द्वारा शहरी क्षेत्र की आजाद चौक, मदनमोहन चौबे वार्ड, फारेस्टर वार्ड व सिविल लाइन की टंकियो की जांच की गई थी।

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