‘दवे को सौंपा यानि पूरा होगा काम’

On Date : 19 May, 2017, 2:11 PM
0 Comments
Share |

अंतिम विदाई में भावुक हुए नेताओं ने याद किया अनिल दवे का व्यक्तित्व और कृतित्व
राजनीतिक संवाददाता, भोपाल :
नर्मदा तट पर अनिल माधव दवे को अंतिम विदाई देने पहुंचे कई केंद्रीय मंत्री और नेता व आम आदमी मुखाग्नि बाद हुई श्रद्धांजलि सभा में भावुक हो गए। सभी ने नम आंखों से दवे को विदाई दी। श्रद्धांजलि सभा में संघ प्रमुख मोहन भागवत का संदेश पढ़ते हुए भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि जब दवे विभाग प्रचारक थे तब से संघ प्रमुख से उनकी मित्रता थी। उनका जाना व्यक्तिगत क्षति है। वे अदम्य इच्छाशक्ति के धनी थे। संघ और संगठन के काम को वे योजनाबद्ध और रणनीति बनाकर पूरा करते थे। अच्छे रणनीतिकार होने के चलते कोई काम सौंपे जाने पर यह तय मान लिया जाता था कि वह अब अच्छे से पूरा होगा।


श्रद्धांजलि सभा में भावुक हुईं उमा भारती
केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने वर्ष 2003 के चुनावी अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे जनता की नब्ज जानते थे। अनुभव साझा करने के दौरान भावुक उमा ने कहा कि वे कभी उनका नाम नहीं लेती थीं। उन्हें हमेशा भइया कहती थी और वे मेरे लिए हमेशा जीवित रहेंगे।

दवे के जीवन पर छपा फोल्डर बंटा
अंतिम संस्कार के दौरान अनिल माधव के जीवन पर प्रकाशित किया गया एक फोल्डर भी बांटा गया। स्थानीय प्रशासन ने बांद्राभान में नदी महोत्सव स्थल पर रातोंरात अस्थाई सड़क बनवाने समेत अन्य व्यवस्थाएं पूरी करार्इं। होशंगाबाद कलेक्टर अविनाश लवानिया व सीईओ जिपं पीसी शर्मा मॉनिटरिंग करते रहे। श्रद्धांजलि सभा और अंतिम संस्कार स्थल पर एलईडी स्क्रीन लगाई गई थी जिस पर अंतिम संस्कार का कार्यक्रम लाइव चलता रहा।

हम उनके आदर्शों को युवा मोर्चा में उतारेंगे: अभिलाष
मैंने रचनात्मक और सकारात्मक सोच के प्रणेता अनिल दवे जी के साथ व्यक्तिगत रूप से कई बार काम किया है। आजाद संदेश यात्रा के दौरान उनके साथ काम करने का अवसर मिला। उनके जीवन चरित्र से कई चीजें सीखने को मिलती थी। उनकी कही हुई कई बातें हैं जिन्हें युवा मोर्चा में उतारंगे तो निश्चित फायदा होगा।

निष्काम कर्मयोगी थे: रामलाल
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने कहा कि अनिल दवे निष्काम कर्मयोगी थे। चरैवेति के सिद्धांत पर चलने वाले दवे में नर्मदा संरक्षण और पर्यावरण को लेकर गजब की चिंता रहती थी। संघ के सहसरकार्यवाह सुरेश सोनी और भैयाजी जोशी ने भी श्रद्धांजलि सभा में अनिल माधव दवे के कामों को याद किया और उन्हें अच्छा रणनीतिकार बताया।

सुबह 6.35 बजे  :   दवे का पार्थिव शरीर नदी का घर से रवाना
सुबह 8.50 बजे  :  पार्थिव शरीर परिजनों, शुभचिंतकों के साथ बांद्राभान पहुंचा
सुबह 9 बजे       :  चितास्थल के समीप लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की
सुबह 9.38 बजे  :  भाई अभय दवे ने मुखाग्नि दी

PM के प्रतिनिधि बनकर आए हर्षवर्द्धन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधि के तौर पर अंतिम संस्कार में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री डा. हर्षवर्द्धन ने कहा कि स्व. दवे की सेवाएं केंद्रीय मंत्रिमंडल में हमेशा याद रखी जाएंगी। इधर, पीएम ने दवे की विल को अपने ट्विटर पर टैग भी किया।

ये मंत्री-नेता रहे मौजूद
अंतिम संस्कार के दौरान प्रदेश के मंत्री गोपाल भार्गव, गौरीशंकर शेजवार, नरोत्तम मिश्रा, गौरीशंकर बिसेन, रुस्तम सिंह, जयभान सिंह पवैया, अर्चना चिटनिस, लाल सिंह आर्य, विश्वास सारंग, सूर्यप्रकाश मीणा भी शामिल थे। भाजपा के राष्ट्रीय सहसंगठन महामंत्री सौदान सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान मौजूद रहे। इसके अलावा संघ नेताओं में दत्तात्रेय होसबोले, भैयाजी जोशी, सुरेश सोनी, हस्तीमल, अरुण जैन, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, सांसद प्रहलाद पटेल, उदय प्रताप सिंह, राकेश सिंह, मनोहर ऊंटवाल, राकेश सिंह, नेहरू युवा केंद्र के उपाध्यक्ष बीडी शर्मा, विधायक रमेश मेंदोला, प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा विजेश लूनावत, अरविन्द भदौरिया, भोपाल महापौर आलोक शर्मा, रमेश शर्मा गुट्टूभैया, दिलीप बिल्डकान के सीएमडी दिलीप सूर्यवंशी, पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह समेत भोपाल और होशंगाबाद क्षेत्र के स्थानीय नेता और अधिकारी दवे के अंतिम संस्कार में शामिल रहे।

बांद्राभान में केंद्रीय मंत्री अनिल माधव दवे के अंतिम संस्कार में मौजूद संघ पदाधिकारी भैयाजी जोशी, सुरेश सोनी, दत्तात्रेय होसबोले, केंद्रीय मंत्री उमा भारती, भाजपा के राष्टÑीय संगठन महामंत्री रामलाल, केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार।

 


केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, विधायक मुकेश चतुर्वेदी व रमेश शर्मा गुट्टू भैया।


‘नदी का घर’ से रवाना होने के दौरान पार्थिव शरीर को कंधा देते मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व भाजपा के राष्टÑीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय।


बांद्राभान में स्व. दवे के अंतिम संस्कार के पहले गार्ड आॅफ आॅनर देते सशस्त्र पुलिस बल।


अंतिम संस्कार में मौजूद विधानसभा स्पीकर सीतासरन शर्मा, भाजपा नेता संजय जोशी व तपन भौमिक।

विभाग प्रचारक थे अनिलजी, मैं उनका स्वयंसेवक: CM
भरोसा नहीं होता है कि अनिल दवे जी अब हमारे बीच नहीं हैं। वे अद्भुत व्यक्तित्व के धनी, नदी संरक्षक, पर्यावरणविद, मौलिक चिंतक, कुशल संगठक थे। अनिल जी मौलिक लेखक थे। वे कल्पनाशील मस्तिष्क के धनी थे। उन्होंने अनेकों किताबें लिखीं। वे असाधारण रणनीतिकार थे। बचपन से जीवन भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के नाते पूरा जीवन, देश और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया।
अनिल जी को जो भी दायित्व मिला, उनको पूरा किया। संघ की योजना के अनुरूप वे भोपाल विभाग के प्रचारक थे और मैं उनका स्वयं-सेवक रहा। वे सबका ध्यान रखते थे। मुझे याद है कि जब मेरा जब एक्सीडेंट हुआ था तब उन्होंने मेरा आॅपरेशन मुम्बई में डॉ. ढोलकिया के हाथों से ही करवाना सुनिश्चित किया था। वे अपने कार्यकर्ताओं का हमेशा ध्यान रखते थे। सदैव कार्य में रमे रहते थे। कुशल रणनीतिकार थे। वर्ष 2003, 2008 व 2013 के विधान सभा व लोक सभा के चुनाव उनकी कुशल रणनीति के कारण हम जीते, मैं यह कहूं तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। विजय में उनका उल्लेखनीय योगदान था।

सदैव काम मे लगे रहने वाले, रमे रहने वाले एवं मां नर्मदा के वे ऐसे भक्त थे कि उन्हें जब भी समय मिलता था, मैय्या के तट पर पहुंच जाते थे। वे पायलट थे। उन्होंने नर्मदा की परिक्रमा छोटे विमान से की थी, फिर राफ्ट से गुजरे थे। इस दौरान नर्मदा संरक्षण के लिए गांवों में संरक्षण चौपाल बैठकें की थीं। बांद्राभान में नर्मदा महोत्सव का प्रति दो वर्ष में आयोजन करते थे। मैं भी उसमें भाग लेता था। ‘नमामि देवि नर्मदे’-सेवा यात्रा का विचार जब मैंने उन्हें बताया था तो वे बहुत प्रसन्न हुए थे। मेरी बहुत इच्छा थी कि वे नर्मदा सेवा यात्रा में आये और वे 09 मई को यात्रा में आए। नदी जल और पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम में 8 मई को भोपाल में भाग लिया था। परसों उनसे मेरी बात हुई थी। मैंने बताया कि अमरकंटक कार्यक्रम बहुत अच्छा हुआ। मैंने उन्हें आगे की योजनाएं बनाईये एवं मिलकर उसे पूरी करना है। बहुत एवं अल्प समय में पर्यावरण एवं वन मंत्री होने के नाते अस्वस्थ होने के बाद भी उन्होंने बड़ी दक्षता एवं प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया था। भारतीय संस्कारों में पले-बढ़े पगे अनिल जी अब हमारे बीच नहीं हैं, सहज भरोसा नहीं होता।

उनके निधन से हमने कुशल संगठक, नदी संरक्षक, पर्यावरणविद एवं एक नेतृत्व जो देश के लिए समर्पित था उसे खोया है। उनका जाना प्रदेश व देश के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं सदमें में हूं। लेकिन नियती पर किसी का बस नहीं है। उनकी वसीयत मिली है जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि संभव हो तो उनका अंतिम संस्कार बांद्राभान में नदी महोत्सव के स्थान पर किया जाए। अंतिम संस्कार वैदिक रीति से करें एवं उनकी स्मृति में स्थल का नामकरण, पुरस्कार, प्रतियोगिता इत्यादि का आयोजन न करें। अगर कुछ करना है तो पेड़ लगाए एवं उन्हें संरक्षित कर बढ़े करें एवं नदी तालाब का संरक्षण का कार्य करेंगें तो उन्हें आनंद होगा और ये करते हुए भी उनके नाम का उल्लेख न करें। एक महामानव ही इस तरह की वसीयत लिख सकता है।

मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। भगवान ने श्री चरणों में उनको स्थान दिया है। ईश्वर दिवंगत आत्मा शांति दे। मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ता परिजनों को गहन दुख सहन करने की क्षमता दे। हो सके तो अनिल जी फिर लौटें....
शिवराज सिंह चौहान (ब्लॉगर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

आपकी राय

Name
Email
Comment
No comments post, Be first to post comments!

मसाला ख़बरें

रूही सिंह ने सोशल मीडीया पर बिखेर अपने हुस्न के जलवे

मुंबई: फिल्म 'कैलेंडर गर्ल्स' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली रूही सिंह इन दिनों अपनी हॉट इंस्टाग्राम...

जैकी श्रॉफ की बेटी ने फिर दिखाई बोल्ड अदाएं

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ की बेटी कृष्णा श्रॉफ अपनी तस्वीरों की वजह से सोशल मीडिया चर्चा में...

प्रदेश टुडे मैगज़ीन

November, 2014

ब्लॉग

शेयर बाज़ार