हर खुशबू की भी होती है अपनी भाषा

On Date : 07 January, 2014, 8:56 AM
0 Comments
Share |

लंदन: अक्सर ऐसा होता है कि किसी पार्टी में आप एक ताजा-तरीन खुशबू से रू-ब-रू होते हैं, जिसे आप पहचान नहीं पाते हैं। लेकिन ऐसे भी कुछ लोग होते हैं, जो खुशबुओं की भाषा पहचानते हैं। मलय प्रायद्वीप में मनोविज्ञानियों की एक टीम ने खुशबुओं की भाषा के अस्तित्व का नया सबूत ढूंढ़ा है। जहाई भाषा में अलग-अलग तरह की खुशबुओं की पहचान के लिए दर्जनों अलग-अलग शब्द हैं। उदाहरण के लिए, `इटपिट` शब्द कई तरह के फूलों और पके फलों, डुरिआन, परफ्यूम, साबुन, एक्वि लेरिया लकड़ी और बियरकैट की खुशबुओं की पहचान कराती है। उसी तरह `केस` शब्द पेट्रोल, धुएं, चमगादड़ के मल, चमगादड़ की गुफा और जंगली अदरक की जड़ की गंध के लिए इस्तेमाल होता है। माजिद और ब्युरेनहाल्ट ने जहाई भाषा बोलने वालों और अंग्रेजी भाषा बोलने वालों के समक्ष एक ही तरह के रंगों और खुशबुओं के तैयार किए गए समूह को पहचानने की चुनौती रखी। शोध में पाया गया कि जहां जहाई बोलने वाले रंगों और खुशबुओं को आसानी से पहचान पा रहे थे, वहीं अंग्रेजी भाषियों को खुशबुओं को पहचानने में मुश्किल हो रही थी। उदाहरण के लिए अंग्रेजी भाषी प्रतिभागी रंगों की अपेक्षा खुशबुओं को पहचानने में ज्यादा वक्त लगा रहे थे। इस शोध से यह साबित हुआ कि विभिन्न तरह के गंध को पहचानने और उन्हें नाम देने की असमर्थता की जैविक सीमाएं हैं। इससे यह भी पता चलता है कि गंध को पहचानने की असमर्थता सांस्कृतिक परिणाम है न कि जैविक। यह शोध पत्रिका `कॉगनिशन` में ऑनलाइन जारी की गई है।

आपकी राय

Name
Email
Comment
No comments post, Be first to post comments!

मसाला ख़बरें

रूही सिंह ने सोशल मीडीया पर बिखेर अपने हुस्न के जलवे

मुंबई: फिल्म 'कैलेंडर गर्ल्स' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली रूही सिंह इन दिनों अपनी हॉट इंस्टाग्राम...

जैकी श्रॉफ की बेटी ने फिर दिखाई बोल्ड अदाएं

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता जैकी श्रॉफ की बेटी कृष्णा श्रॉफ अपनी तस्वीरों की वजह से सोशल मीडिया चर्चा में...

प्रदेश टुडे मैगज़ीन

November, 2014

ब्लॉग

शेयर बाज़ार