GPS रिपोर्ट: अंधाधुंध गति में थी बस,स्कूल प्रबंधन समेत हर जिम्मेदार कार्रवाई की जद में

On Date : 06 January, 2018, 1:10 PM
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इंदौर में चार मासूमों की मौत से आंसुओं का उबाल, हर जिम्मेदार को भेजो जेल
हर आंख नम-अंतिम विदाई में दुल्हन जैसा श्रृंगार

इंदौर/भोपाल, ब्यूरो। इंदौर में डीपीएस बस हादसे में खत्म हुए चार बच्चों को आज अंतिम विदाई दी गई। इस मौके पर पूरा शहर गमगीन था। नन्हीं बच्चियों की पूरी श्रृंगार में विदाई देख हर नम आंख में गुस्सा देखा गया। लोगों ने हादसे के लिए हर जिम्मेदार व्यक्ति को सजा देने की मांग की। दूसरी ओर हादसे को लेकर इंदौर पुलिस ने गैरइरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।  इंदौर पुलिस को जांच में चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। घटना की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों ने जीपीएस रिपोर्ट में यह तथ्य पाया है कि स्पीड गवर्नर लगे होने के बावजूद बस की स्पीड तय सीमा से ज्यादा थी। पुलिस का मानना है कि यदि बस में स्पीड गवर्नर लगा था तो फिर बस निर्धारित स्पीड से ज्यादा तेज कैसे दौड़ रही थी? यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि बस का स्पीड गवर्नर काम नहीं कर रहा था। उधर डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्रा ने कहा है कि इस हादसे में हुई एफआईआर के दायरे में स्कूल प्रबंधन को भी लाया जा रहा है और हर जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चूंकि ड्रायवर की मौत हादसे में हो चुकी है। इसलिए स्कूल प्रबंधन के वे जिम्मेदार जो बसों का काम देखते हैं, जांच के दायरे में आएंगे। परिवहन विभाग के नियम के मुताबिक स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर तो लगाए जाते हैं लेकिन वास्तव में इनका उपयोग नहीं किया जाता। पैसे बचाने के चक्कर में घटिया क्वालिटी के स्पीड गवर्नर बसों में लगाए जाते हैं। चेकिंग के बाद बसों से स्पीड गवर्नर को डिस्कनेक्ट कर दिया जाता है। ऐसा ही पुलिस को इंदौर में हुए हादसे में डीपीएस की बस में देखने को मिला है।

परिवहन आयुक्त ने जारी की स्कूलों को एडवायजरी
परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि हमने स्कूलों को एडवायजरी जारी की है कि वे अपने ड्रायवरों को ट्रेनिंग दें और उन्हें बताएं कि बस चलाते समय उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग ने ट्रैफिक पुलिस की मदद से पूरे प्रदेश में स्कूल बसों की चेकिंग शुरू कर दी है। इसके अलावा परिवहन विभाग स्कूलों में जाकर भी बसों को चेक कर रहा है कि कहीं कोई खामी न हो। साथ ही स्कूल प्रबंधन को ताकीद कर रहा है कि रेगुलर स्कूल बसों को चेक कराएं। दूसरी ओर पुलिस की प्रारंभिक जांच में स्कूल बस की रफ्तार 60 से अधिक मानी जा रही है। जबकि स्कूल बस का स्पीड गवर्नर 40 किलोमीटर प्रति घंटे पर सेट होता है। ऐसे में आशंका है कि ड्राइवर ने स्पीड गवर्नर का वॉयर डिस्कनेक्ट कर बस चला रहा होगा।

DPS प्रबंधन का गैरजिम्मेदाराना रवैया :गृहमंत्री
गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का मामला धारा 304 के तहत दर्ज किया है। इस एफआईआर के दायरे में स्कूल प्रबंधन को भी लाया गया है क्योंकि स्कूल प्रबंधन की लापरवाही के चलते ही बस की मरम्मत नहीं कराई गई। इसी वजह से बस का स्टेयरिंग फेल हुआ और इतना गंभीर हादसा हो गया। गृहमंत्री ने कहा कि यदि स्कूल बस में कोई तकनीकी खराबी थी तो उसे दूर किया जाना था लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इसमें गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाया। सिंह ने इस पूरे मामले में दुख व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों के भविष्य से कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। इसके लिए कुछ और सख्त निर्णय लिए जाएंगे। इस मामले में जल्द ही सीएम शिवराज सिंह चौहान से बात करेंगे। आने वाले समय में स्कूल बसों की स्पीड और कम की जाएगी। साथ ही लगातार स्कूल बसों की चेकिंग और फिटनेस पर परिवहन विभाग और यातायात पुलिस काम करेंगे।

आज बयानों में घायल बच्चे खोलेंगे हादसे का सच
हादसे के वक्त बस में एक दर्जन बच्चे सवार थे। आठ बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। हादसे के बाद बच्चे बदहवासा हो गए थे, जिस कारण उनके बयान नहीं हो सके हैं। आज दोपहर बाद घायल बच्चों के बयान लिए जाएंगे। बच्चों के बयान से स्पष्ट होगा कि ड्राइवर स्कूल से निकलते से ही बस तेज चला रहा था या हादसे से कुछ वक्त पहले बस अनियंत्रित हुई। वहीं बस निर्माता कंपनी की टेक्निकल टीम को भी पुलिस ने जांच के लिए घटनास्थल पर बुलाया है। आज कंपनी के इंजीनियरों की टीम भी जांच करने आएगी। एएसपी मनोज राय ने बताया कि हादसे के वक्त बस की स्पीड कितनी थी, उसका पता स्पीड गवर्नर की टेक्निकल जांच में सामने आएगा। बस में जीपीएस लगा था। पुलिस ने आज शाम तक जीपीएस की रिकार्डिंग स्कूल प्रबंधन से देने को कहा है। जीपीएस की रिकार्डिंग में स्कूल बस की रफ्तार का भी पता चल जाएगा।  

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