जनपद शिक्षा केंद्र की गलती से सैकड़ों छात्र नहीं दे पाएंगे हिन्दी ओलंपियाड परीक्षा

On Date : 29 December, 2017, 10:45 PM
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छतरपुर। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा हिंदी ओलंपियाड परीक्षा 2017 का आयोजन किया जा रहा है। इस परीक्षा में कक्षा 7 एवं 8 के बच्चे शामिल हो रहे हैं, लेकिन हायर सेकेण्डरी क्रमांक 1 एवं 2 के उन बच्चों के अरमानों पर पानी फिर गया जिन्होंने हिंदी ओलंपियाड परीक्षा में शामिल होने का सपना संजोया था। जनपद शिक्षा केन्द्र छतरपुर की लापरवाही के कारण करीब 200 बच्चे इस परीक्षा से वंचित हो रहे हैं। इस बात से बच्चों के साथ अभिभावकों और स्कूल के प्रधानाध्यापक भी परेशान हैं।

हिंदी ओलंपियाड परीक्षा 2017 का आयोजन 31 दिसम्बर रविवार को एमएलबी सेंटर में किया जा रहा है। इस परीक्षा में हायर सेकेण्डरी क्रमांक 1 के करीब 100 और क्रमांक 2 के 60 बच्चों ने परीक्षा में शामिल होने के लिए अपने प्रधानाध्यापक के माध्यम से फार्म भरा था। प्रधान अध्यापक को फर्स्ट ए भरकर बीआरसी कार्यालय में जमा करना था और बीआरसी को फर्स्ट बी तथा केन्द्राध्यक्ष को यह भरकर आॅनलाईन सूची सहित भेजना था, लेकिन जनपद शिक्षा केन्द्र छतरपुर द्वारा फर्स्ट बी फार्म ओलंपियाड परीक्षा के लिए भरकर नहीं भेजा गया, जिस कारण करीब 200 बच्चे परीक्षा से वंचित हो रहे हैं। दरअसल, भोपाल से जो परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की सूची भेजी गई हैं उसमें हायर सेकेण्डरी क्रमांक 1 और हायर सेकेण्डरी 2 तथा सरानी के बच्चों के नाम नहीं हैं।
 
अध्यापक बोले, बीआरसी की लापरवाही...
दोनों विद्यालयों के प्रधान अध्यापक विजय पाठक और महेश व्यास का कहना है कि उनके द्वारा छात्रों की सूची बीआरसी कार्यालय में सीएसी संतोष असाटी के पास जमा की गई थी, जिसकी पावती भी उनके पास है। लेकिन बीआरसी ने लापरवाही बरती और उनके छात्रों के नाम आॅनलाईन नहीं भेजे गए।

अभिभावकों में गुस्सा, स्टूडेंट्स मायूस...
अभिभावकों को मामले की जानकारी लगी तो उनमें भारी रोष देखा गया। छात्रों में भी हताशा का है, क्योंकि सभी छात्र हिंदी ओलंपियाड परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। जिम्मेदार अधिकारी इसे मामूली बात मानकर चल रहे हैंै। लेकिन ऐसे मुद्दे गंभीर हैं और इनमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए ताकि भविष्य में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न कर सकें।

फर्स्ट ए फार्म हेडमास्टर द्वारा भरकर बीआरसी कार्यालय में जमा किया जाता है। बीआरसी द्वारा फर्स्ट बी फार्म भरकर आॅनलाइन जानकारी छात्रों की भेजी जाती है। बीआरसी ने फर्स्ट बी फार्म नहीं भरा होगा, जिससे उनके नाम आॅनलाइन सूची में दर्ज नहीं हैं।
    रमाशंकर गुप्ता, सहायक परियोजना समन्वयक
     जिला शिक्षा केन्द्र छतरपुर।
यह कोई बड़ी बात नहीं है। आॅपरेटर द्वारा छात्रों की सूची आॅनलाइन नहीं भेजी गई होगी, जिस कारण उनके नाम आॅनलाइन नहीं हैं। दोबारा भी ऐसे छात्रों को चांस मिल जाएगा।
    मुलायम सिंह, बीआरसी जनपद शिक्षा केन्द्र छतरपुर।
मैं डाटा इंट्री आॅपरेटर जरूर हूं, लेकिन आॅनलाईन फीडिंग का काम एमआईएस के अरशद खान द्वारा किया जाता है। मैंने छात्रों के नाम आॅनलाइन नहीं भेजे हैं।
    हिमांशु अरजरिया, डाटा इंट्री आॅपरेटर
    जनपद शिक्षा केन्द्र छतरपुर।

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