कुलपतियों ने ग्रांट बढ़ाने प्रेशर डाला तो शासन ने मांगा आय-व्यय ब्यौरा

On Date : 17 April, 2018, 1:25 PM
0 Comments
Share |


अरबों की FDR फिर भी शासन से मांग रहे और पैसा

प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर
जीवाजी विश्वविद्यालय समेत प्रदेश के जिन सात पारंपरिक विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने शासन पर ब्लॉक ग्रांट बढ़ाने का प्रेशन बनाना शुरू किया तो अब उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों से पिछले तीन साल की आय -व्यय का हिसाब मांगा लिया है। कुलसचिवों को पूरे वित्तीय ब्यौरे के साथ आज भोपाल में बुलाया गया है। जहां पर विभाग के आला अधिकारी सभी विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति का परीक्षण करेंगे। जिन विश्वविद्यालयों की आमदनी ज्यादा और खर्चा कम हैं हो रहा,उनकी बैंकों मेंं अरबों रुपए की एफडीआर हैं। ऐसे विवि के कुलसचिवों से पूछा जाएगा कि वित्तीय स्थिति अच्छी होने के बाद भी शासन से और पैसा क्यों चाहिए।
बता दें कि प्रदेश में जीवाजी विश्वविद्यालय,देवी अहिल्या विवि इंदौर, बरकतउल्ला विवि भोपाल की वित्तीय स्थिति सबसे बहुत अच्छी है। छात्रों से ली जा रही अलग-अलग तरह की फीस व अन्य स्त्रोंतों से इन विवि की जितनी आय हो रही है,उससे कम व्यय हो रहा। इसलिए ये विवि पिछले कई वर्षों से पैसा इकठ्ठा करने में लगे हैं। इस समय इन विवि की अरबों रूपए की एफडीआर हैं,जिसकी पूरी जानकारी उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों को है। रानी दुर्गावती विवि जबलपुर और अवधेश प्रताप सिंह विवि रीवा,विक्रम विवि उज्जैन भी प्रति वर्ष हो रही आय से अपना खर्चा आसानी से चला रहे हैं और बचत भी कर रहे हैं। छत्रसाल विवि नया है,वहां शाासन जरूरत के हिसाब से पैसा दे रहा है। जिन विवि के पास अरबों की एफडीआर हैं,फिर भी कुलपति लंबे समय से शासन से ब्लॉक ग्रांट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। राज्यपाल से भी कई बार इस बारे में कुलपति बोल चुके हैं। पिछले माह हुई समन्वय समिति की स्थाई समिति की बैठक में भी कुलपतियों ने इस मुद्दे को उठाते हुए उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों पर निशाना साधा कि वे सुनवाई नहीं कर रहे। इसीलिए अब उच्च शिक्षा विभाग आयुक्त ने इस मुद्दे पर उल्टा कुलपतियों को घेरने के लिए आय-व्यय सहित अन्य जरूरी जानकारी मांग ली है।

यह जानकारी मांगी
विवि में संचालित कोर्सों की संख्या। शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कुल पद। शासन से स्वीकृत पद। भरे पद और खाली पदों की संख्या। स्ववित्तीय कोर्सों में स्वीकृत पद,भरे व रिक्त पद। विवि के कोर्सों में वर्ष 2017 में प्रवेशित कुल छात्रों की संख्या। छात्र और शिक्षक अनुपात।
वित्तीय वर्ष 2015-16 से वर्ष 2016-17 और वर्ष 2017-18 में अलग-अलग स्त्रोतों से जो वास्तविक आय हुई है,उसकी पूरी जानकारी। वेतन भत्तों व अन्य कार्यों पर जो व्यह हुआ,उसकी जानकारी। हर कोर्स में कितनी छात्र संख्या है और संबंधित विभागों में क्या संसाधन उपलब्ध हैं।

आपकी राय

Name
Email
Comment
No comments post, Be first to post comments!

प्रदेश टुडे मैगज़ीन

November, 2014

ब्लॉग

शेयर बाज़ार