लगातार चौथी वर्ष फिर दिखे अन्नदाता की आंखों में आंसू

On Date : 08 September, 2017, 9:46 PM
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उड़द की फसल ने किया पूर्णत: बर्बाद, बिना काटे बखरे जाने लगे खेत
प्रदेश टुडे संवाददाता, जरुवाखेड़ा
बारिश के पर्याप्त न होने से फसले नष्ट होने की कगार पर है। यह लगातार चौथा वर्ष है जब पुन: रबी की फसल ने किसानों को खून के आंसू रुला दिया। जहां देखे वहां किसानों के चेहरों पर साहूकारों के ब्याज और बैंक के कर्जे रूपी चिंता की लकीरे साफ नजर आने लगी है। कहने को तो सरकार कहती है मप्र कृषि के क्षेत्र मे देश मे अव्वल है पर वास्तविक आंकड़े इसके विपरीत है। किसान लगातार चार साल से रबि की फसल से टूट चुका है अब तक तो कम से कम बीज ही निकल आता था पर इस बार तो लोगो को मजदूरों की कटाई फसल से निकलती नहीं दिख रही है। 
किसान दीपक यादव ने बताया कि हमने  लगभग 15 एकड़ मे उड़दा की फसल की वोवनी की थी पर पानी न गिरने से पूरी फसल नष्ट हो गई यदि हम उडद की कटाई कराते है तो लगभग 25 हजार मजदूरी लग जायेगी इसके अलाबा थ्रीसिंग खर्च अलग जबकि फसल मे दाने है ही नहीं। इनके अनुसार ये फसल काटने की बजाय खेत को ही बखर देंगे।
धूप, इल्लियों ने किया फसल को तबाह 
मूड़रा के एक अन्य किसान गोविन्द ठाकुर ने बताया कि सोयाबीन के पेड़ मे फलियां तो बहुत है एक पेड़ मे लगभग 100 से ज्यादा फलियां लगी है लेकिन पानी न गिरने से फलियों में दाने नहीं भरे है। वहीं तेज धूप से अब पेड़ सूखने लगे है। हनौता के किसान प्रभान यादव के अनुसार सोयाबीन की फसल मे इस बार इल्लियां भी बहुत लगी है। किसानो के अनुसार दवाईयों का असर भी बेअसर रहा। इस प्रकार अब किसान की आस केवल भगवान से लगी है वह निरंतर आसमान की ओर देख रहा है। यदि शीघ्र ही पानी न गिरा तो सोयाबीन की फसलें भी नष्ट हो जाएंगी।

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