इंदिरा IVF इंदौर ने मनाया अपना स्थापना दिवस

On Date : 06 January, 2018, 5:47 PM
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को समर्पित था कार्यक्रम
इंदौर। इंदिरा आई.वी.एफ. के इंदौर सेंटर के दो वर्ष पूरे होने पर स्थापना दिवस का कार्यक्रम बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान को समर्पित करते हुए मनाया।  कार्यक्रम की शुरूआत बेटियों द्वद्दारा रंगारंग प्रस्तुतियों से हुआ एवं इन्दिरा आईवीएफ से लाभान्वित दम्पतियों ने अपने अनुभव साझा किए।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में इंदौर आईवीएफ सेंटर में कार्यरत स्टाफ  के बच्चों ने नृत्य, गाना, कविता आदि कार्यक्रम पेश किए।  कन्या भ्रूण हत्या के बारे में जागरूकता पैदा करने की थीम पर एक बच्ची ने नृत्य पेश किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती प्रियदर्शनी पाण्डे इंदौर पीसीपीएनटी मण्डल की मॉनिटरिंग टीम की सदस्या एवं विशिष्ठ अतिथि डॉ. पूनम माथुर थी जो कि इंदौर फोगसी सोसायटी की पूर्व अध्यक्ष रह चुकी है। मुख्य अतिथि श्रीमती प्रियदर्शनी पाण्डे ने कहा कि  बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान से समाज में पैदा की जा रही जागरूकता से कन्या को बचाने में सफलता मिल रही है। इससे लिंगानुपात भी काफी हद तक कम हुआ है।  डॉ. योगिता परिहार ने दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूआत की। स्वागत भाषण में उन्होंने इंदिरा आई.वी.एफ. इंदौर सेंटर की विकास यात्रा पर प्रकाश डाला तथा बताया कि अल्प समय में इंदौर सेंटर से काफी नि:संतान दम्पति लाभान्वित हुए है। डॉ. ज्योति त्रिपाठी ने इसका श्रेय सेन्टर पर उपलब्ध एडवांस टेक्नोलॉजी, बेहतरीन उपकरण, सुविधाएं और अनुभवी व प्रशिक्षित स्टाफ  के अथक प्रयास को दिया। इस मौके पर एक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई जिसमें संतान नहीं होने पर परिजन द्वारा मन्नत मांगना, मंदिर, देवरों में जाना और पंडितों के पास जाने के अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार किया गया और बताया गया कि सही इलाज नहीं लेने के बजाय इस तरह भटकने से संतान प्राप्ति के अवसर कम हो जाते हैं जबकि आईवीएफ  ट्रीटमेंट के द्वारा संतान प्राप्ति आसान है।  इस दौरान सेंटर पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले कार्मिकों  को सम्मानित किया गया। अंत में धन्यवाद की रस्म निभाते हुए सेंटर की आई.वी. एफ. स्पेशलिस्ट डॉ. ज्योति त्रिपाठी ने बताया कि हमारा लक्ष्य हर सूनी गोद को भरना है। उनकी सफलता की पूंजी आईवीएफ की अत्याधुनिक विशिष्ट लैब (आईसीएसआई, आईवीएफ, लेजर के साथ हेचिंग, एग डोनर, ब्लास्टोसिस्ट कल्चर आदि) हैं। सेंटर द्वारा जागरूकता के लिए समय-समय पर नि:शुल्क परामर्श शिविर भी लगाए जाते हैं।

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