पूछताछ केन्द्र नहीं, आरटीओ में भटकते हैं आवेदक

On Date : 16 April, 2018, 3:20 PM
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जानकारी के लिए मजबूरी में लेना पड़ता है दलालों का सहारा
प्रदेश टुडे संवाददाता,जबलपुर

करमेता में लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुए आरटीओ कार्यालय को चालू हुए 10 माह का समय बीत चुका है, लेकिन इस आलीशान कार्यालय में आज तक पूछताछ केन्द्र की व्यवस्था नहीं बन पाई है। रिसेप्शन के  न होने से 20 कमरों में संचालित हो रहे आरटीओ कार्यालय की स्थिति अजायब घर जैसी हो गई है। हकीकत यह है कि कार्यालय में कौन सा काम कहां होता है इसकी ठीक-ठीक जानकारी आवेदकों को नहीं हो पाती है जिसके चलते उन्हें बेवजह यहां से वहां भटकना पड़ता है।
कार्यालय के प्रवेश द्वार पर रिसेप्शन की व्यवस्था न होने से कार्यालय में चल रही गतिविधियों की जानकारी लोगों को नहीं हो पाती है। जानकारी के अभाव में उन्हें अनावश्यक रूप से विभिन्न शाखाओं में घुसकर पूछताछ करना पड़ता है जिससे शाखा में बैठे आरटीओ कर्मचारियों के काम में बेवजह व्यवधान उत्पन्न होता है और काम भी प्रभावित होता है।
दलालों को मिल रहा बढ़ावा
कार्यालय में काम की पुख्ता जानकारी देने के लिए पूछताछ केन्द्र के न होने से दलालों को बढ़ावा मिल रहा है। आरटीओ कर्मचारी स्वयं आवेदकों को जानकारी देने से हर समय बचते हैं और उन्हें दलालों से मिलवा देते हैं। देखा जाए तो काम की जानकारी के अभाव में आवेदकों को चक्कर काटने पड़ते हैं और बाद में थक हारकर उन्हें मजबूरन दलालों का सहयोग लेना पड़ता है।

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