JU ने जिन छात्रों को सरकारी कॉलेजों में ट्रांसफर किया वे फार्म भरने तैयार नहीं

On Date : 14 April, 2018, 3:15 PM
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निजी कॉलेजों से अपनी फीस व दस्तावेज वापस मांग रहे छात्र
उधर जनभागीदारी के नाम पर 2 से 3 हजार मांग रहे सरकारी कॉलेज
प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर

जीवाजी विश्वविद्यालय ने अंचल के निजी कॉलेज संचालकों को बड़ा झटका दिया है। उनके द्वारा स्नातक प्रथम वर्ष में नामांकन कराए गए प्राइवेट छात्रों को नजदीकी सरकारी कॉलेजों में ट्रांसफर कर दिया है। ऐसे छात्रों की संख्या करीब सात सौ बताई गई है। छात्रों से पूछे बिना ही उन्हें अचानक सरकारी कॉलेजों में भेज दिया है।
वहीं संबंधित कॉलेजों में इन छात्रों से जनभीदारी के नाम पर दो से तीन हजार रुपए फीस मांगी जा रही। वहीं विवि ने भी 500 लेट फीस के साथ परीक्षा फार्म भरने की अनुमति दी है। छात्र इतने पैसे खर्च कर सरकारी कॉलेजों के जरिए प्राइवेट फार्म भरने तैयार नहीं हैं। जिन निजी कॉलेजों में उन्होंने फीस जमा कराई है,वहां पर छात्र फीस और दस्तावेज वापस लेने पहुंच रहे हैं। निजी कॉलेजों के संचालक भी छात्रों को सलाह नहीं दे रहे कि वे सरकारी कॉलेज के जरिए फार्म भर दें। बता दें कि पिछले डेढ़ माह से इन प्राइवेट छात्रों के परीक्षा फार्म भराने को लेकर माथापच्ची चल रही थी। कुछ अधिकारी निजी कॉलेजों का फेवर कर रहे थे,ईसी ने भी फेवर किया,लेकिन फिर भी कॉलेज संचालकों को निराशा ही हाथ लगी है।
CU का निर्णय,फिर भी कोई राहत नहीं
हाईकोर्ट के आदेश पर कार्यपरिषद ने दस साल पुराने निजी कॉलेज वालों को राहत देते हुए प्राईवेट छात्रों के फार्म भराने का फैसला किया। बावजूद इसके रेक्टर प्रो.आरजे राव ने अलग से एक कमेटी गठित कर कॉलेज वालों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पिछले माह हुई ईसी की बैठक में निर्णय हुआ था कि पुराने निजी कॉलेजों का निरीक्षण किया जाकर संबद्धता शर्तों की पूर्ति करने वालों को प्राईवेट फार्म फॉरवर्ड कराए जाएं। रेक्टर द्वारा गठित कमेटी ने ईसी के इस निर्णय को पलट दिया है।

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