ओवरब्रिज निर्माण में लेटलतीफी नेताओं ने फेरी आंख,जनता त्रस्त

On Date : 06 September, 2017, 10:02 PM
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रेल्वे फाटक बंद होने पर जर्जर अंडरब्रिज से निकलने की मजबूरी
प्रदेश टुडे संवाददाता, सागर 
मकरोनिया रेल्वे फाटक पर ओबरब्रिज न बनना अब जिले के हर एक नागरिक की समस्या बन गई है। मकरोनिया चौराहे से मात्र एक किमी की दूरी पर स्थित जबलपुर रोड पर रेलवे फाटक दिन और रात मिलाकर लगभग 25 बार बंद होता है। यहॉ से शहर, ग्रामीण क्षेत्रों व अन्य जिलों से आने जाने वाले लोगों का हर दिन आवागमन होता है। कोई दो पहिया वाहन से तो कोई चार पहिया वाहन से यहॉ से निकलते है। रेल्वे फाटक ही वह सीमा से जहॉ से छतरपुर, टीकमगढ़, बंडा, शाहगढ़, जबलपुर से आने-जाने वाली बसें और ट्रकों का रोजाना निकलना बना रहता है। किंतु जब फाटक बंद मिलता तो बसों को लगभग 10-20 मिनट का इंतजार करना पड़ता है जिससे इन बसों में बैठे मुसाफिरों का समय भी बर्बाद होता है तथा फाटक के दोनों ओर चक्काजाम की स्थिति भी निर्मित हो जाती है। इसके अलावा फाटक को बंद देख दो पहिया व चार पहिया वाहन अंडरनुमा ब्रिज से निकलने की कोशिश करते है किंतु अंडरनुमा ब्रिज की स्थिति भी वर्तमान में राम भरोसे हो गई है। ब्रिज के नीचे गढ्डे ही गढ्डे है और इन गढ्डों में पानी भरा होने से दो पहिया व चार पहिया वाहन इन गढ्डों में फंस जाते है। अंडर ब्रिज के  नीचे भी दिन में कई बार जाम लगने से आने और पीछे फंसे वाहन चालकों में आपसी झड़प भी कई बार हो जाती है। आखिर ओवरब्रिज बने या ना बने किंतु वर्तमान में अंडरनुमा ब्रिज की हालत कैसे सुधरेगी और और इस हालत को सुधारने कौन जनप्रतिनिधि आगे आएंगा? यह बात जनता के लिए जानना अनिवार्य हो गई है। 
फाटक बंद होने से लगता है जाम
दिन के समय जब आवागमन अधिक होता है और फाटक बंद मिलता है तो कई बार क्षेत्र में फाटक के दोनों ओर जाम की स्थिति बन जाती है। कुछ पैदल यात्री फाटक बंद होने से रेल्वे लाईन को पार करने की कोशिश भी करते है जिससे कोई दुर्घटना भी हो सकती है। वही दूसरी ओर जाम की स्थिति में फंसे वाहन चालकों के बीच हर रोज आपसी झड़पे होती देखी जा सकती है। जाम की स्थिति में फंसे लोगों का समय तो बर्वाद होता ही है वही वाहनों में ईधन की बर्वादी भी होती है।
रेल्वे फाटक अधिकांश नेताओं का गंतव्य स्थान
गौरतलब है कि रेल्वे क्रासिंग पार करना आम जनता की समस्या ही नहीं है। भाजपा शासित सरकार में कई मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य नेताओं के अलावा संभाग के आला अधिकारियों का निकलना रोजाना फाटक से होता है। जब यह फाटक बंद मिलता है तो अक्सर नेता व अधिकारी भी अंडरब्रिज से निकलते है किंतु रेल्वे अंडरब्रिज के गढ्डों की कोई भी सुध नहीं लेता। जिससे आवागमन की उक्त समस्या आम जनता के लिए परेशानी बन गई है।

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