मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए

On Date : 13 August, 2017, 10:10 PM
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धार। अनाज तिलहन व्यापारी समिति द्वारा आयोजित संगीतमय भागवत कथा में तीसरे कथा वाचक पं. श्री अनिरूद्धचार्यजी महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में अहंकार नहीं आने देना चाहिए, यह विनाश का कारण होता है। मानव का स्वभाव है कि जब धन दौलत या बड़ा पद होता है तो वह अहंकार में डूब जाता है। वहीं से उनका विनाश शुरू होता है। उन्होंने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा बलि बहुत धनवान और धर्मात्मा था। उनके यहां से कोई भी खाली नहीं जाता था। राजा गुणवान होने के साथ ईश्वर का भक्त था। राज्य की प्रजा भी सुखी थी। एक बार राजा ने यज्ञ कराया। उसी दौरान भगवान विष्णु ब्राह्मण बालक का अवतार लेकर पहुंचे। राजा ने उनका सत्कार किया और दान मांगने का आग्रह किया। बालक ने कहा राजन मुझे कुछ नहीं चाहिए बस केवल ढाई कदम जगह चाहिए। इस बात पर राजा को अहंकार आ गया और जमीन देने का वचन दे दिया। तब बालक ने एक कदम में पूरी जमीन और एक कदम में पुरा राज-पाट नाप लिया। संगीतमय भागवत कथा में श्रृद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डुब कर कथा का आनंद ले रहे हैं।
पं. श्री अनिरूद्धचार्यजी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश भक्ति के भजन भी सुनाए। उन्होंने स्वच्छता अभियान, बेटी बचाओ पर भी कथा के माध्यम से अपनी बातें रखी। पं. श्री अनिरूद्धचार्यजी ने कहा कि उनकी संस्था प्रतिवर्ष सैकड़ों गरीब कन्याओं का निशुल्क विवाह सम्पन्न कराती है। अनाज तिलहन व्यापारी समिति द्वारा प्रतिदिन विषेष प्रसादी वितरण किया जा रहा हैं।

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