कब्बाली की परम्परा को बचाने की जरूरत : साबरी

On Date : 14 July, 2017, 9:45 PM
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प्रदेश टुडे संवाददाता, इंदौर
देश के प्रसिद्व कब्बाली गायक हाजी असलम साबरी ने कहा कि आज देश में कब्बाली की परम्परा को बचाने की जरूरत है। क्योंकि इस इगनोर किया जा रहा है। अगर यही हाल रहा  तो आने वाले समय में कब्बाली खत्म हो जाएंगी। यह बात उन्होंने इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुुखातिब होते हुए कही। वे यहां पर एक कार्यक्रम शिरकत करने के लिए आए है। उन्होंने क हा कि मै आज भी सूफी पर काम कर रहा हूूं । मेरी इससे संबंधित आठ किताबें लिखी जा चुकी है। नौवी छापने के लिए गई है। वह किबात जब बाजार में आएंगी तो आपकों लोगों को सूफी से संबंधित बहुत कुछ नया जानने को मिलेगा।   असलम साबरी ने कहा कि संगीत से उपर उठकर कुछ नहीं होता है। किसी भी देख में हर तरह के लोग होते है,लेकिन उनमें से संगीत सबसे अगल स्थान  रखता है।  मौसकी पावरफुल चीज है,लेकिन लोग  ख्वाइिश के गुलाम हो चुके है,इसलिए इसका असर नहीं हो रहा है। फिर फनकार को जिंदा रखने के लिए जरूरी है। इसके लिए उसे भी पैसों की जरूरत होती  है,मैं इस बात को मानता हूं,परन्तु पैसा ही सब कुछ नहीं होता है। लेकिन आज कल कब्बाली में इसका असर दिख रहा है। 
मैंने आज भी शास्त्रीय  संगीत का दामन नहीं छोड़ा
असलम  साबरी ने कहा कि मुझे इतने साल से  कब्बाली सुनाते हुए हो गए,लेकिन मैंने आज भी शास्त्रीय संगीत का दामन नहीं छोड़ा है। लेकिन देखने में आता है कि आज जो नये कब्बाली गायक आए है,उन्हें शास्त्रीय संगीत का ही ज्ञान नहीं है। साहित्य जानते ही नहीं। इसीलिए ये हालत हो रही है। 
रही सही कसर फिल्मवाले पूरी कर रहे है। आज हर गली मुहल्ले में साबरी है ,जो शास्त्रीय संगीत जानते ही नहीं है। कब्बाली के नाम पर जो मन आ रहा है गा रहे है। हालाकि अभी भी एक तबका है जो आज भी कब्बाली को प्यार करता है। मेरे नस-नस में कब्बाली भरी है। मुझे और कुछ भी नहीं आता है। आठ साल की उम्र में एक कमरें में बंद क ई घंटों तक बंद रहता था और वहीें पर रियाज करता था।
 
मैं  फकीराना मिजाज वाला व्यक्ति हूं
शहर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए असलम साबरी ने कहा कि हम आज भी फकीराना मिजाज के व्यक्ति हूं। पिता ने   संगीत का शौक पैदा कर दिया था,वह अभी भी उसी तरह बना हुआ है। हमारे बच्चे परेशान रहते है। कहते है,अब्जा आप अधिकतर घर से बहार ही रहते हो। जब मैं घर में भी रहता हूं तो मुझे किसी से कोई मतलब नहीं होता है। मैं अपने आप में बात करता हूं। घर में कौन क्या कर रहा है,किसी से कोई सरोकार नहीं रखता।
मेंहदी  हसन मेरे पसंदीदा गायक
उन्होंने कहा कि गजल गायकों में मेंहदी हसन मेरे पसंदीदा गायक है,उनके अलावा मैं और किसी को नहीं सुनता हूं। फिल्मी दुनिया में वैसे बहुत सारे गायक है,जो पता नहीं गजल के नाम पर क्या गाते है। लेकिन सब कुछ चल रहा है,कोई देखने वाला नहीं है। श्रोता भी इन्हें सुन रहा है।

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