‘अहाता’ बंद करने के पक्ष में नहीं आबकारी अफसर

On Date : 14 November, 2017, 5:10 PM
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राजस्व का होगा नुकसान,रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही
प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर

प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान की शराब दुकानों के ‘अहाता‘ बंद करने की घोषणा के बाद आबकारी अफसरों की टेंशन बड़ गई है। यह कदम उठाया तो राजस्व पर सीधा असर पड़ेगा, इसलिए आबकारी महकमा के अफसर इसके पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने जिला बार रिपोर्ट तैयार कराई है। जिसमें अहातों की संख्या,इनसे मिलने वाले राजस्व और इन्हें बंद करने के बाद क्या प्रभाव पड़ सकता है,इसका भी उल्लेख किया गया है। लगभग सभी जिलों से रिपोर्ट आई है कि अहाता बंद होते हैं तो करोड़ों रुपए आबकारी राजस्व का नुकसान होगा। यह चिंता जाहिर की गई हे कि आगामी वित्तीय वर्ष में शराब दुकानों के निष्पादन पर भी निश्चत रूप से इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
बता दें कि प्रदेश भर में कुल 3300 शराब दुकानें हैं। इनमें से करीब 80 फीसदी दुकानें में ‘अहाता’खुले हुए हैं। इन अहातों पर बैठकर शराब पीने की सुविधा रहती है। सीएम ने अपनी घोषणा में कहा था कि प्रदेश भर से बेटियों और महिलाओं की तरफ से ऐसी शिकायतें आती हैं कि आस-पास के अहातों में लोग शराब पीने आते हैं,इससे क्षेत्र का माहौल खराब होता है। भय के कारण बहन,बेटियां उन जगहों से गुजरने से बचती हैं।

भोपाल में चल रहीं मीटिंग
प्रदेश की नई आबकारी नीति को लेकर भोपाल में प्रमुख सचिव वाणिज्यिककर मनोज श्रीवास्वत व आबकारी आयुक्त अरुण कोचर आज प्रदेश भर के आबकारी अधिकारियों की बैठक ले रहे हैं। जिसमें अपर आयुक्त,संभागीय उपायुक्त,सहायक आयुक्त,जिला आबकारी अधिकारी मौजूद हैं। खास बात यह है कि इस बैठक में सबसे पहले इसी मुद्दे पर विचार-मंथन हो रहा है कि अहाता बंद करने से राजस्व की कितनी हानि होगी।

इसलिए खोले गए अहाता
आबकारी विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक शराब दुकानों में अहाता इसलिए खोले गए ताकि दुकानों से शराब खरीदकर लोग सड़कों पर सुनसान जगहों पर शराब सेवन न करें। कानून व्यवस्था पर असर पड़ता है। अहाता सुविधा देने की पीछे यही मंशा रही कि दुकान से शराब लेकर वहां पर ही सेवर किया जा सके। अहाता के लायसेंस से शासन को अलग से करोड़ों रुपए राजस्व भी मिलता है। दुकान की लाइसेंस फीस की 1 प्रतिशत राशि लेकर अहाता खोलने का लाइसेंस ठेकेदार को दिया जाता है।

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