मरीज तड़पता रहा, नहीं खोला एक्सरे रूम

On Date : 13 January, 2018, 5:17 PM
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सिविल अस्पताल में चल रही रेडियोग्राफर की मनमानी

प्रदेश टुडे संवाददाता
सिविल अस्पताल, डबरा में पदस्थ रेडियोग्राफर की मनमानी के चलते मरीजों को खासा परेशान होना पड़ रहा है। जिसके चलते दुर्घटना में घायल होकर पहुंचा मरीज अस्पताल में पड़ा-पड़ा लगभग डेढ़ घंटे तक तड़पता रहा, लेकिन रेडियोग्राफर ने एक्सरे रूम खोलने की जहमत नहीं उठाई, जिस कारण मजबूरन मरीज को इलाज हेतु निजी नर्सिंग होम ले जाना पड़ा।
ग्राम खेड़ा पलायछा निवासी विक्रम रावत बस पर क्लीनरी करता है, बीती दोपहर वह चलती बस के गेट से गिरकर बुरी तरह घायल हो गया, बस में बैठे लोगों द्वारा फोन करने पर डायल 100 मौके पर पहुंची और घायल को लेकर  डबरा सिविल अस्पताल पहुचाया, जहां डॉक्टरों ने कहा कि इसका पहले एक्सरे करना पड़ेगा, तब इलाज शुरू हो सकेगा, जिस पर परिवार के लोग घायल को खुद स्ट्रेचर पर लेकर एक्सरे रूम तक पहुंचे, तो एक्सरे रूम बंद था, परिजनों ने डॉक्टर से इसकी शिकायत की, तो डॉक्टरों ने खुद अपने फोन से रेडियोग्राफर हरदयाल शिवहरे को फोन लगाया, उसके बाद भी वह नहीं पहुंचा, जिससे घायल एक्सरे रूम के बाहर ही तड़पता रहा। उसके बाद परिजन इसकी शिकायत करने एसडीएम कार्यलय पहुंचे, मगर एसडीएम नहीं मिलीं, लेकिन  स्टाफकर्मी ने कहा कि वापस अस्पताल पहुंचो, हम बात करके रेडियोग्राफर को वहां भिजवाते हैं। उनके आश्वासन पर परिजन पुन: घायल को लेकर  पहुंचे, और फिर लगभग आधा घंटे तक इंतजार किया, लेकिन इसके बावजूद रेडियोग्राफर हरदयाल शिवहरे  नहीं पहुंचा, तब मजबूरन घायल के परिजनों को उसे लेकर इलाज हेतु निजी नर्सिंग होम में ले जाना पड़ा। यहां बता दें कि रेडियोग्राफर हरदयाल शिवहरे की ड्यूटी दोपहर 2 से शाम 8 बजे तक है, मगर शाम 4 बजे तक वह अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंचते हैं। रेडियोग्राफर की रसूख का यह आलम है वह डबरा सिविल अस्पताल  में लगभग 20 साल से पदस्थ है, इस दौरान उसका न तो कोई ट्रांसफर हुआ है, और न ही उसे और कहीं अटैच किया गया।
शिवपुरी। जिला अस्पताल में  18 दिनों से डायलिसिस यूनिट बंद पड़ी हुई है, जिससे यहां आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन इस पूरे मामले से अंजान बना हुआ है। यहां बता दें कि अस्पताल में डीसीडीसी कंपनी द्वारा पार्टनरशिप में स्थापित की गई डायलिसिस यूनिट फिलहाल बंद पड़ी हुई है, जिसका कारण मशीनों का खराब होना है। जबकि मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सगर इससे अनभिज्ञ हैं, और उन्हें यह ज्ञात ही नहीं है कि जिला अस्पताल में क्या समस्याएं हैं। हालांकि सिविल सर्जन डॉ. गोविंद सिंह और डायलिसिस यूनिट प्रभारी एसएस गुर्जर का कहना है कि उन्होंने कंपनी के अधिकारियों के साथ ही शासन को भी पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत करा दिया है।
भुगतान को लेकर बंद हुई डायलिसिस यूनिट
मध्यप्रदेश शासन और डीसीडीसी कंपनी के बीच डायलिसिस यूनिट को लेकर अनुबंध होने के बाद शिवपुरी अस्पताल में डायलिसिस यूनिट प्रारंभ की गई। जिससे शहर के उन मरीजों को लाभ हुआ जिनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं है, और वह डायलिसिस कराने के लिए ग्वालियर जाते थे।





 इस सुविधा से लोगों ने राहत महसूस की, लेकिन कुछ समय पूर्व भुगतान को लेकर उक्त यूनिट को बंद कर दिया गया। उस समय मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में कंपनी और शासन के बीच सुलह होने के बाद डायलिसिस यूनिट पुन: प्रारंभ हो गई, लेकिन 22 दिसंबर से डायलिसिस यूनिट में लगी दोनों मशीनें खराब हो गईं, जिससे डायलिसिस कराने वाले मरीजों के समक्ष पुन: संकट खड़ा हो गया।

रोजाना दो मशीनों       से होती है चार मरीजों  की डायलिसिस
जिला अस्पताल में डायलिसिस की दो मशीनें लगी हुई हैं, जिन पर दो शिफ्ट सुबह और शाम डायलिसिस की जाती है और एक बार में दो मरीज की डायलिसिस होती है और दोनों शिफ्ट मिलाकर कुल चार मरीज डायलिसिस कराते हैं, लेकिन डायलिसिस यूनिट बंद होने से स्थिति विकट हो गई है।
डायलिसिस यूनिट का संचालन डीसीडीसी कंपनी करती है, और मशीनें कंपनी के अंडर में ही हैं, जो 22 दिसंबर से खराब पड़ी हैं। जिसे लेकर कम्पनी के लोगों को मौखिक, पत्र व ईमेल के माध्यम से जानकारी दे दी गई हैै।
डॉ. गोविंद सिंह, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल शिवपुरी

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