प्राइवेट प्रैक्टिस: सख्त हुई सरकार CMHO को रिकवरी के आदेश

On Date : 12 February, 2018, 4:02 PM
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सरकारी डॉक्टरों ने नहीं भरा सरकारी खजाना

प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस तो कर रहे है, लेकिन इस निजी प्रैक्टिस के एवज में सरकार के खजाने में जमा कराया जाने वाला शुल्क शासकीय चिकित्सको ने   नहीं दिया है।
सरकार ने शासकीय चिकित्सको के प्रायवेट प्रैक्टिस पर लगे प्रतिबंध को इस शर्त पर हटाया था कि वह तय शुल्क रोगी कल्याण समिति में जमा कराएगें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ग्वालियर सहित पूरे मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ ऐसे डॉक्टर्स की लंबी लिस्ट है जिन्होंने कई वर्षो से रोगी कल्याण समिति में पैसे जमा नहीं कराए। लिहाजा अब स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ.उपेंद्र दुबे ने प्रदेश के सभी सीएमएचओं को ऐसे चिकित्सको से रिकवरी करने के आदेश जारी किए है।
ये टारगेट पर
सीएमएचओ के लिए जारी आदेश में कहा गया है कि 11 जनवरी 1999 से शासकीय चिकित्सको से प्राइवेट प्रैक्टिस का शुल्क वसूला जाना है। शासन ने इनकी प्राइवेट प्रैक्टिस पर से प्रतिबंध हटाया था। इसलिए अब सीएमएचओ ऐसे सभी डॉक्टरों के दस्तावेजों को खंगालेंगे। खास बात ये है कि उन चिकित्सको से भी रिकवरी की जाएगी, जो रिटायर हो चुके हैं।

इस हिसाब से जमा करना थी राशि
वर्ष 1991 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या के आधार पर शुल्क तय किया गया था।
50 हजार से ज्यादा जनसंख्या वाले नगरीय क्षेत्रों में स्थित सहायक शल्य चिकित्सक या समकक्ष चिकित्सको को 500 रुपए प्रतिवर्ष देना था।
विशेषज्ञ या समकक्ष वरिष्ठ डॉक्टरों को 1 हजार रुपए अपनी पदस्थापना के अस्पताल की रोगी कल्याण समिति में जमा कराना था।

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