पकी फसल पर बारिश की मार

On Date : 14 September, 2017, 9:37 PM
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आधी फसल भी नहीं निकली, बारिश ने बढ़ाई  किसानों की मुसीबत
प्रदेश टुडे संवाददता, बल्देवगढ/टीकमगढ
जिले सहित बल्देवगढ़ ब्लॉक में बारिश के लिए हाहाकार मचा हुआ है। क्षेत्रभर में बारिश के लिए लोग मन्नते कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर बुधवार को तेज बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। देखा जाए तो अल्पवर्षा के कारण खरीफ की फसल में पीला मौजिक लगने से किसानों को अधिक नुकसान देखना पड़ा है। वहीं अचानक तेज बारिश के चलते किसानों को और अधिक आफत में डाल दिया है। बची खुची खेतों में खड़ी फसल बारिश होने के कारण खराब होने लगी है। जिससे किसानों को इस साल के ऊपर आफत बरसी है। किसानों का कहना है कि बारिश कम होने के कारण खरीफ की फसल लागत के हिसाब से आधी भी नहीं उपज हुई है।
दरअसल पहले बारिश न होने के कारण पीला मौजिक से किसानों की फसलें नुकसान देखने को मिला है। तो अब कटाई के दौरान सोयाबीन उड़द सहित अन्य फसलें बारिश की भेंट चढ़ गई हैं। क्षेत्र के कई इलाकों में एक घण्टे हवा के साथ तेज बारिश हुई है। हरदास राजपूत, शंकर यादव, जगत राजपूत, जगप्रसाद यादव, राजू सहित दर्जनों किसानों ने बताया कि अल्पवर्षा के कारण खरीफ की फसल की पैदावार लागत के हिसाब से आधी नही हुई। अब शेष बची फसल में बारिश के कारण खराब होने की आशंका बन गई है। बीज की बुआई के हिसाब से देखा जाए तो लागत न मिलने से किसानो का कर्ज और अधिक बढ़ गया है। अब तो जिले को सूखा घोषित किया जाना चाहिए। 
कटाई जोरों पर,मजदूरों की मांग तेज
किसानो ने बताया कि बिगड़ते मौसम को देखते हुए क्षेत्र के किसानों ने खरीफ की फसल की कटाई जोरों पर कर दी है। लेकिन कटाई के दौरान ही तेज मौसम के साथ बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। तो वहीं बारिश के मिजाज से किसानों ने फसल की कटाई शुरू कर दी है। दूसरी ओर कटाई के लिए मजदूर नही मिल रहे हैं। साथ ही मजदूरों ने मजदूरी की राशि भी बढ़ा दी है।
किसानों ने कहा कि लगातार चार साल से मौसम खराब के चलते किसानो को नुकसान हो रहा है। इस साल अल्पवर्षा होने से किसानों को अपनी फसल नही मिल सकी है। और आगे की फसल को देखते हुए जिले को सूखा घोषित किया जाना चाहिए।
बीमा से वंचित कई किसान 
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कई किसान इस योजना से वंचित रह गए हैं। किसानों के होने वाले फसल बीमा में समय सीमा समाप्त होने से कई किसान बीमा से वंचित रह गए। बीमा न होने से किसानों को चिन्ता सताने लगी है। 
नहीं निकल रही लागत
किसान हरिराम राय ने बताया कि 70 एकड़ का खेत है। जिसमें उड़द, सोयाबीन, धान की फसल बोई थी। लेकिन लागत ही नही निकलने पर फसल का खेत में जानवरों का छोड़ दिया है। क्योंकि कटाई और थ्रेसिंग की मजदूरी ही नही निकल रही।
अपेक्षाकृत कम हुई फसल
मक्खन यादव ने कहा कि 20 एकड़ भूमि में उड़द, धान की बुवाई की थी जिसमें हर साल 40क्विंटल उड़द पैदा हो जाती थी। लेकिन अल्पवर्षा, पीला मौजिक और थोटे कीडे के कारण फसल सूख गई। इस साल लागत की अपेक्षा कम उपज हुई है। जिसमें मजदूरी, थ्रेसिंग का पैसा ही नहीं मिल रहा है।

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