1 मई से लागू होगा रियल एस्टेट अधिनियम, सभी के लिए 2022 तक मकान

On Date : 21 April, 2017, 9:47 AM
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नई दिल्ली। वर्ष 2022 तक सभी देशवासियों को अपना घर होने का सपना साकार कराने के लिए मोदी सरकार ने कमर कस ली है| इस दिशा में वह निजी भूमि पर निजी निवेश कर शुरू की गई सस्ती आवास परियोजनाओं का समर्थन करने पर भी विचार कर रही है। आगामी 1 मई से रियल एस्टेट अधिनियम भी लागू हो जाएगा।
 
केंद्रीय आवास एवं शहरी गरीबी उपशमन मंत्री एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आवासों की मांग केवल केन्द्र सरकारर राज्य सरकारें पूरी नहीं कर सकती। भूमि राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में है जिसे उन्हें उपलब्ध कराना है पर तेजी से बढ़ती जनसंख्या और खासकर आर्थिक रुप से कमजोर और मध्यम वर्गों को आवास उपलब्ध कराने के लिए निजी निवेश से निजी भूमि पर शुरू की गई सस्ती आवास परियोजनाओं को भी समर्थन देने पर सरकार विचार कर रही है।
 
श्री नायडू ने बताया कि गत वर्ष अस्तित्व में आया रियल एस्टेट अधिनियम उपभोक्ताओं और इस उद्योग के हित में की गई सबसे दूरगामी पहल है। इस अधिनियम की 59 धाराएं गत वर्ष 1 मई से लागू हो गई। शेष 32 धाराएं आगामी 1 मई से प्रभावी हो जाएंगी जिन्हें तीन माह के अंदर जारी किया जाना है। सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को नियमों का अधिसूचित करने विनियामक प्राधिकरणों एवं अपीलीय अधिकरणों के लिए केवल 10 दिन शेष रह गए हैं 12 राज्यों ने नियमावली अधिसूचित कर दी है तथा 16 राज्यों ने उसे तैयार कर लिया है। पूर्वोत्तर राज्यों के बारे में भूमि को लेकर विधिक राय ली जा रही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी राज्य ऐसा कर अनावश्यक कार्यवाही से बचेंगे।
 
न्होंने बताया कि सभी को आवास मिशन को पूरा करने तथा प्रवासियों, छात्रों, एकल कामकाजी महिलाओं आदि की आवास आवश्यकता की पूर्ति के लिए शहरी किराया आवास नीति 2017 तैयार की है जिसे अनुमोदन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
 
श्री नायडू ने तुलनात्मक आंकड़े देते हुए बताया कि पिछले 22 महीनों में 96,266 करोड़ रुपये के निवेश से 2008 शहरों और कस्बों में गरीबों के लाभार्थ 17,73,533 सस्ते आवासों के निर्माण का अनुमोदन किया गया है जबकि 2004 से 2014 तक पिछली सरकार ने 10 वर्षों में 32,713 करोड़ रुपये से 13,82,768 घरों के निर्माण को ही मंजूरी दी थी। मोदी सरकार ने 12 लाख रुपये से मकान बनाने वालों को 6.50 प्रतिशत ब्याज पर ऋण और 18 लाख रुपये वाले मकान निर्माण पर 3 से 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि 45 स्मार्ट शहरों में 21,224 करोड़ रुपये की लागत से शहरी गरीबों के लिए 2,87,487 सस्ते मकान बनाने के लिए सस्ती आवासीय योजनाएं शुरु की जा रही हैं।
 
उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने विज्ञापन छपवाने पर करोड़ों रुपया खर्च कर रहे हैं। पर राजधानी में गरीबों को सस्ते मकान उपलब्ध कराने की केन्द्र सरकार की किसी भी योजना में शामिल नहीं हो रहे हैं। उन्होंने सभी को 2022 तक अपना सस्ता मकान उपलब्ध कराने के सरकारी मिशन की चुनौती का सभी राज्य सरकारों और नगर प्रशासनों से मिलकर मुकाबला कर गरीब का अपना घर होने का सपना साकार कराने की अपील की।

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