नियम कानून ताक पर रख दौड़ रहे निजी स्कूल वाहन, प्रशासन बना मौन

On Date : 11 August, 2017, 10:07 PM
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प्रशासन हादसों से नहीं ले रहा सबक
प्रदेश टुडे संवाददाता, सिराली
निजी विद्यालयों में संचालित बसों का संचालन नियम विरुद्ध किया जा रहा है। विभाग आंखें मूंदे बैठा है। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी जिम्मेदार गंभीरता नहीं दिखा रहे है। जिसके चलते ऐसे बस संचालकों के हौसले बुलंद है। स्कूल बसों में होने वाली घटना, दुर्घटनाओं के बाद भी सबक नहीं लिया जा रहा है और न ही नियमों के अनुसार बसों का संचालन कराया जा रहा है। निजी स्कूलों में बस संचालकों द्वारा शासन के नियमों एवं निर्देशों की अव्हेलना की जा रही है। बस संचालन में उच्चाधिकारियों की निर्देशों की अव्हेलना की जा रही है। जिले के उच्चाधिकारियों द्वारा स्कूल बस संचालन के लिए कई नियम बनाए गए, लेकिन यह सिर्फ कागजों की ही शोभा बढ़ाते है। उनका पालन कराने के लिए कोई पहल नहीं दिख रही है। स्कूल बसों में सीसीटीवी कैमरे सहित अनुभवी चालक स्प्रिट गवर्नर फास्टेड बॉक्स सहित स्कूल स्टॉप का एक कर्मचारी वाहन में मौजूद होना आवश्यक है तथा अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं को पूर्ण रखने के निर्देशों की अव्हेलना की जा रही है। 
नहीं लगे उउळश् कैमरे  
तत्कालीन कलेक्टर द्वारा स्कूल संचालकों को पिछले शिक्षा सत्र की शुरुआत में बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए सख्त निर्देश दिए थे। तमाम निर्देशों एवं लंबा समय बीत जाने के बाद भी बसों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए हैं। नगर में जितनी भी बसें संचालित हो रही है सभी में सीसीटीवी कैमरों का अभाव है। एक एक विद्यालय में 3 से 4 बसें निजी बस संचालकों से अनुबंधित है। ऐसे में बच्चे गफलत में किस बस में बैठ जाते हैं यह पता नहीं होता है। जिन्हे पालकों द्वारा ढूंढा जाता है। ऐसे में सीसीटीवी कैमरे काफी कारगार सिद्ध होते है। 
प्रारंभिक उपचार की सुविधा भी नदारद 
बसों में सीसीटीवी कैमरे के अलावा अन्य कई महत्वपूर्ण सुविधाओं का भी अभाव है। बसों मे फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन खिड़की, व्यवस्थित बैठक व्यवस्था का भी अभाव है। 
अनफिट बसों में छोटे बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाकर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। वर्तमान में संचालित की जा रही कुछ बसों की हालत है कि यह बस का जमीनी सतह भी विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त नहीं होता है, वहीं कुछ बसों की छतों से पानी टपकता है एवं खिड़की भी सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। ऐसे में बच्चों की जान से खिलवाड़ ़किया जा रहा है।

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