SP के लॉकर में रहता था रोजनामचा, कैसे देते छुट्टी ?

On Date : 19 May, 2017, 2:55 PM
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प्रदेश टुडे संवाददाता, ग्वालियर
 पीटीएस एसपी संजीव कंचन अपने चेम्बर के लॉकर में रोजनामचा रहता था। बीमार नव आरक्षक को छुट्टी रोजनामचे में बिना सिक डाले नहीं दी जा सकती थी। एसपी भी खुद दोपहर को एक बजे के बाद दफ्तर आते थे।
पीटीएस तिघरा में नव आरक्षक राजकुमार अहिरवार की मौत के मामले की जांच करने आए एडीजी अशोक अवस्थी ने बीते रोज स्टाफ से अकेले अकेले बात की। सूत्रों की मानें तो यहां स्टाफ ने खुलासा किया कि एसपी संजीव कंचन किसी पर भरोसा नही करते थे। रोजनामचा संबंधित अफसर के पास रहने के बजाय वे खुद अपने दफ्तर में रखते थे। अब ऐसे में किसी नव आरक्षक की सिक (बीमारी की छुट्टी) डालना होती थी तो उनके आने का इंतजार करना होता था। एसपी भी दोपहर 12.30 से 1 बजे के बीच दफ्तर आते थे। ऐसे में नियमानुसार उन्हें छुट्टी देने में परेशानी होती थी। इसके बाद भी यदि कोई बीमार जवान को छुट्टी देता था तो एसपी उसे रिश्वत देकर छुट्टी देने का आरोप लगा देते थे। ऐसे में निचला स्टाफ बिना एसपी की अनुमति के किसी को छुट्टी देने में भी डरता था। यही रिपोर्ट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट ने भी हाईकमान को सौंपी है।
गुटबाजी की भी शिकायत
यहा नव आरक्षकों ने शिकायत की है कि तिघरा पीटीएस में अफसरों ने जातिवाद के चलते गुटबाजी भी कर रखी थी। सामान्य व ओबीसी छात्रों के बीच दो गुट बने हुए थे। यह सब पीटीएस के अफसरों की ही देन थी।

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