परिस्थितिवश अपराधी बनता है व्यक्ति:डॉ.जैन

On Date : 14 September, 2017, 9:38 PM
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मप्र मानव अधिकार स्थापना दिवस पर संगोष्ठी आयोजित
प्रदेश टुडे संवाददाता टीकमगढ़
मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार एवं जिला न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, के अध्यक्ष अरुण कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में विगत दिवस मप्र मानव अधिकार स्थापना दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
 
उक्त संगोष्ठी में डॉ. सुभाष कुमार जैन ने मानव अधिकारों पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि यदि मानव में अंहिसा का गुण होगा तो उसमें दया, बधुंता, प्रेम, दूसरों की मदद करना आदि विचार स्वत: आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जन्म के साथ अपराधी नहीं होता बल्कि परिस्थितियां दूसरों के मानव अधिकारों के हनन को प्रेरित करती हैं। हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों के मानव अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। संगोष्ठी में शासकीय पी.जी. कॉलेज के प्राचार्य एम.के. अवस्थी ने मानव अधिकार के सरंक्षण में अपने उद्बोधन में बताया कि मानव अधिकार के सरक्षंण से श्रेष्ठतम कोई विचारधारा नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र के लोग नैतिक वह लोकतंत्र है यदि अनैतिक है तो वह वस्तुतंत्र है। यदि न्यायपाने में विलंब होता है तो वह न्याय नहीं है। पी.जी.कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. रजनी तिवारी ने मानव अधिकार की प्राकृतिक विचाराधारा को बताते हुये कहा कि भारतीय परम्परा बसुन्धैव कुटुुम्बकम की धारणा मानती है। शासकीय अभिभाषक अशोक गोयल ने अपने विचारों में कहा कि प्राचीन समय में सतीप्रथा, बहुविवाह, बंधुआप्रथा एवं दहेज प्रथा इत्यादि कुरीतियां फैली हुई थी, जिस पर मानव अधिकारों का संरक्षण करते हुए अधिनियम बनाकर दूर किया गया। 
 
संगोष्ठी में उपस्थित अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष आर.एस.तोमर ने कहा कि आज सारे लोग केवल अपने अधिकारों के पीछे जा रहे हैं। उन्हें अपने कर्तव्य का पालन भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाजन अर्थात् चरित्रवान लोग जहां जाते है वहीं रास्ते बन जाते हंै। 

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