सूरमा की फैंक 21 अप्रैल 2017

On Date : 21 April, 2017, 12:33 PM
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पत्रकारों की नई पीढ़ी को शायद सगीर बेदार साहब की अजमत से वख्फियत नहीं होगी। कल भोपाल के इस वेटरन जर्नलिस्ट का इंतकाल हो गया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट सगीर मियां की सहाफत साठ की दहाई की इब्तिदा से स्टार्ट होती है। वो चाहते तो उस दौर में आराम की सरकारी मुलाजिमत कर लेते, लेकिन मिल्लत के लिए कुछ करने का जज्बा लिए उन्ने दिल्ली के मशहूर उर्दू अखबार दावत में रिपोर्टर बनना कुबूल किया। अस्सी क ी दहाई में भोपाल आए और यहां हितवाद में अंग्रेजी पत्रकारिता शुरु कर दी। हितवाद के बाद इन्हें मरहूम रमेश अग्रवाल ने अपने अंग्रेजी अखबार नेशनल मेल में बुलवा लिया। मियां की जित्ती अच्छी उर्दू थी उत्ती ही भेतरीन अंग्रेजी थी। उनके बनाए हेडिंग और इन्ट्रो को आज भी लोग याद करते हैं। पुराने शहर में इनकी बैठक अत्तु मियां पत्रकार के यहां हुआ करती। तब वहां इश्त्यिाक आरिफ और देवीसरन सहित कई अदीब आया करते थे। बाद के सालों में इन्होंने पत्रकारिता से किनारा कर मीकेप्स नाम का ईदारा बनाया और जहीन बच्चों को पढ़ाने और उन्हें स्कॉलरशिप दिलाने के काम में लग गए। अपनी जिंदगी के तीस साल उन्होंने मीकेप्स में काम करते हुए गुजार दिए। कलम के धनी इस वेटरन जर्नलिस्ट को खिराजे अकीदत।

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