सूरमा की फैंक 13 फरवरी 2018

On Date : 13 February, 2018, 12:50 PM
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इज्जत और दोस्ती मांगी नहीं जाती है, मेरे दोस्तों ये कमाई जाती है। सूबे की सरकार का जनसंपर्क मेहकमा हर बरस उसकी नजर में भेतरीन किसम के पत्रकारों को अवार्ड देता है। इनमें नेशनल, स्टेट और आंचलिक लेवल के अवार्ड होते हैं। नेशनल लेवल पे गणेश शंकर विद्यार्थी, माणिक चंद्र वाजपेई और विद्यानिवास मिश्र अवार्ड दिए जाते हैं। और इसमें ढाई-ढाई लाख की रकम बतौर इनाम दी जाती है। स्टेट लेवल के अवार्ड में सत्यनाराण श्रीवास्वत, महेंद्र चौधरी और टेलीविजन पत्रकारिता के लिए अवार्डधारी को डेढ़ लाख की रकम मिलती है। इसी तरा आंचलिक पत्रकारिता के लिए एक-एक लाख के सात इनाम मिलते हैं। लेकिन माफ करना साब ये अवार्ड अक्सर ही सवालों के घेरे में रेते हेंगे। एक तो अवार्ड देनें की प्रोसेस ही शर्ताें पे आधारित है। गोया कि जो सरकार की शर्तें मानेगा उसे ही इनाम मिलेगा। दूसरे ये कि खुद पत्रकार को सरकार के दरबार में दरख्वास्त लगाना पड़ेगी के साब मुझे अवार्ड दे दीजिए। साब गैरतमंद पत्रकार तो इससे बचना ही चाहेंगे। यहां तक तो सब ठीक हेगा साब। सूरमा को खबर मिली हेगी के ये अवार्ड अंधा बांटे रेवड़ी चीन्ह-चीन्ह के देय वाली हकीकत को बयां करते हैं। हालांकि इसके लिए दरख्वास्त देने की तारीख 15 फरवरी हेगी बाकी पता ये चला हेगा के सरकार को जिन अपने खासमखासों को अवार्ड देना हेगा उनके नाम पेले ही तय कर लिए गए हेंगे। इक्का दुक्का वो लोग भी हैं जिने ये अवार्ड मिलना चाहिए। बाकी अवार्ड के लिए दरख्वास्तें मांगने और इसके पेलेई अपने वालों को उपक्रत करने के लिए इन अवार्डों के इस्तेमाल को लेके रेडिकल पत्रकारों में अक्सर नाराजगी रहती है। कु छ पत्रकारों का मत हेगा के इन अवार्डाें के लिए नाम सरकार को तय नहीं करने चाहिए। इसके लिए पत्रकारों की कमेटी बने जो पत्रकार को उसके कंट्रीब्यूशन के हिसाब से नाम तय करे। बाकी भाई मियां ऐसा तो होने से रहा, वर्ना प्यारे बच्चे नाराज नई हो जाएंगे।

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