पार्थिव मूर्तियां ही धर्म संगत

On Date : 24 August, 2017, 10:05 PM
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पीओपी और प्लास्टिक की मूर्तियों का पूजन वर्जित 
राजू जमनानी , होशंगाबाद 
विघ्रहर्ता प्रथम पूज्य भगवान गणेशजी आज से विराजमान होंगे। इसके लिए समितियों और लोगों ने काफी व्यवस्था कर ली है। पंडाल बनाए गए हैं जिसमें भगवान गणेशजी की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना की जाएगी। जब बात पर्यावरण की आती है तो चाहे धर्मगुरू, व्यापारी, प्रोफेसर हो या समाजसेवी सभी के एक ही मत सामने आएं है कि भगवान गणेश की प्रतिमा सिर्फ मिट्टी की होनी चाहिए। भगवान ने इस संसार में हर वस्तु को नाश्वर यानि की मिट्टी रूपी बनाया है। इसलिए मिट्टी यानि पार्थिव की मूर्तियों की पूजन करना धर्मसंगत है। जिसका विसर्जन आसानी से हो जाए। 
 
यह है शुभ मूहुर्त 
आचार्य सोमेश परसाई ने बताया कि इस बार भगवान गणेश वरद गणेश के रूप में आ रहे हैं। जो बुद्धि के दाता है। उनको स्थापित करने के लिए शुभ मुर्हूत सुबह 4बजे से लेकर 7 बजे तक तथा सुबह 9 बजे से 12.30 बजे और दोपहर में 3 बजे से 6 बजे, रात्रि 9 से 11 बजे तक है। भगवान गणेशजी को स्थापित करने का सबसे अच्छा मुर्हूत सुबह 4 से 7 बजे और दूसरा 11.40 से लेकर 12.20 बजे तक है। 
 
वरद गणेश होंगे विराजमान 
भगवान लंबोदर प्रथम पूज्य हैं। बुद्धि- रिद्धी- सिद्धी के दाता हैं और विघ्न हर्ता हैं। जो भी व्यक्ति प्रतिदिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना करते हैं उनके घर का विघ्न भगवान गणेश हरण कर लेते हैं। पंचामृत और तर्पण करता है उससे भगवान गणेश अतिशीघ्र प्रसंन्न होते हैं और बुद्धी रूपी लक्ष्मी प्रदान करते हैं। मिट्टी की मूर्ति की स्थापना और पूजन करने से ही रिद्धी सिद्धी प्राप्त होती है। धर्म में केमिलक या पीओपी की मूर्तियों का पूजन वर्जित माना गया है। इससे जल, मृदा और वायु प्रदूषित होती है। इसलिए मिट्टी की मूर्तियां ही बनाकर पूजन करें। 
सोमेश परसाई,ज्योतिषाचार्य 
 
पीओपी से प्रदूषण होता है 
पीओपी की मूर्तियों और उन पर चढ़े रंगों से पर्यावरण के साथ जल और वायु प्रदूषित होते हैं। सभी भक्तगण श्रद्धालु गणेशजी की मिट्टी की मूर्ति की स्थापना कर उनका पूजन करें। मिट्टी की मूर्ति जल में आसानी से घुल जाती है। जो पर्यावरण की दृष्टि से बहुत अच्छा है। हर नागरिक को पर्यावरण के प्रति सचेत रहना चाहिए। कालेजों के छात्र-छात्राओं में जनजागरूकता अभियान चलाकर उन्हें बताया गया है कि ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे कि पर्यावरण को हानि न हो। 
डॉ कामिनी जैन
प्राचार्य, होमसाइंस कालेज  होशंगाबाद 
 
दिया है लोगों को प्रशिक्षण 
पीओपी की मूर्तियां पर्यावरण को प्रदूषित करती हैं। इसी बात के लिए हमने जनजागरूकता अभियान चलाया है। लोगों से निवेदन किया है कि वे पीओपी की केमिकल युक्त मूर्तियों की स्थापना कतई न करें। हमने शिविर लगाकर एक हजार लोगों को गणेशजी की मिट्टी की मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण दिया है। ऐसे कार्यक्रम हम हमेशा करते रहते हैं। हम समय समय पर पर्यावरण की रक्षा के लिए अभियान चलाते हैं तथा लोगों को जनजागरूक कर उन्हें पर्यावरण हितेषी बातें बताई जाती हैं। 
माया नारोलिया, भाजपा नेत्री
 
पार्थिव में सब कुछ समाहित 
हमारी धर्म संस्कृति में पार्थिव में सब कुछ समाहित है। अंतिम स्वरूप मिट्टी ही गया है। चाहे मनुष्य जीवन हो या प्रकृति सभी में परिवर्तन होते हैं। न तो पीओपी की मूर्ति पूजनीय है और न ही प्लास्टिक की। सभी से आग्र्रह है वे मिट्टी की मूर्तियों की स्थापना करें और पर्यावरण को बचाएं। नि:शक्त विशेष विद्यालय के छात्रों द्वारा इको फ्रेंडली मूर्तियों का निर्माण किया जा रहा है।  मूर्तियों में मां नर्मदा के किनारे ऊंगने वाली वनस्पति के बीजों का रोपण कर रहे हैं जिससे कि रिपेरियन जोन में पेड़ बन जाए। 
अनिल अग्रवाल, व्यवसाई एवं समाजसेवी 

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