जिसे सौंपी जिम्मेदारी वही लगा रहे पलीता

On Date : 13 September, 2017, 10:29 PM
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शासन की योजनाओं को फलीभूत नहीं होने दे रहे जनपद सीईओ
प्रदेश टुडे संवाददाता, गंजबासौदा
शासन की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ  भारत अभियान जमीनी स्तर पर कितना सफल हो रही है। यह तो उस योजना के तहत होने वाले कार्य की भौगोलिक स्थिति को देखकर लगता है। जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली समस्त 101 पंचायतों में विगत कई वर्षों से शासन की इस महत्वकांक्षी योजना को अधिकारियों की लापरवाही किस कदर पलीता लगाने पर तुली है।
 
इसकी बानगी कई बार जांच के दौरान सामने आ चुकी है जहां पंचायतों में हितग्राहियों को शौचालय निर्माण के नाम पर मात्र कुछ र्इंटें और एक हाद पत्थर ही हाथ लगा और बाकि क ी राशि बड़े ही रहस्यमयी ढंग से शासन के नुमाइंदों द्वारा हजम कर ली जाती है। समय-समय पर इस योजना में राशि की बढ़ोत्तरी होते होते वर्तमान समय में यह राशि बढ़कर 12 हजार के लगभग हो  गई है। लेकिन हितग्राही को योजना का लाभ दिलाने में कुर्सी पर बैठे अधिकारियों की इच्छाशक्ति कम ही दिखाई देती है इसी का कारण है कि मर्यादा अभियान से लेकर स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस योजना में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है। हालांकि जनपद अध्यक्ष अंजली मनोज यादव इस महत्वकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिये भरसक प्रयास कर रहे हैं लेकिन नवागत सीईओ संजय अग्रवाल का अपने अधिनस्थ कर्मचारियों के साथ सहयोगात्मक रवैया नहीं अपनाने एवं हिटलरशाही के चलते शासन की सभी योजनाओं पर असर पड़ रहा है। 
 
अधिकारी की कार्यप्रणाली उड़ा रही योजनाओं की धज्जियां
प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति को प्रारंभिक कक्षाओं से ही पढ़ाया एवं समझाया जाता है कि हमारा पड़ोस गंदा रहेगा तो उसका असर हमारे जीवन पर क्या पड़ेगा। लेकिन बासौदा जनपद में  बैठे अधिकारियों ने शायद प्रारंभिक शिक्षा नहीं ली या वह शासन की योजना को पूर्णरूप से लागू करवाने में असफल साबित हो रहे हैं इसका प्रत्यक्ष प्रमाण जनपद कार्यालय से महज 5 किमी दूर ग्राम वनवा में साफ देखा जा सकता है जहां ग्राम के धन्नालाल नामक व्यक्ति के शौचालय की  गंदगी कच्ची सड़क पर बह रही है जिसकी शिकायत कई बार ग्रामीणों द्वारा लिखित व मौखिक रूप से की जा चुकी है। लेकिन यहां कार्यालय में बैठे वरिष्ठ अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। 
ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा खुले में शौंच से मुक्त करने के लिये प्रचार प्रसार और मॉनीटरिंग के लिये करोड़ों खर्च किये जा रहे हैं।
 
 और इसी महत्वाकांक्षी योजना के तहत शौचालय निर्माण के लिये पंचायतों को टारगेट भी दिये जा रहे हैं और टारगेट पूरा नहीं करने पर छोटे कर्मचारियों पर गाज गिरती है लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों को यह सोचना चाहिए कि जमीनी अमले के साथ दिये गये टारगेट में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है और ऐसे में ही अग्रवाल जैसे अधिकारी जो केवल अभद्रता और हिटलरशाही करना ही जानते हैं ऐसे में योजनाएं कैसे फलीभूत हो सकती हैं।  बस यही कहा जा सकता है कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली शासन की योजनाओं की धज्जियां उड़ा रही हैं। 
 
 
सीईओ की अभद्रता का वीडियो हुआ वायरल 
क्षेत्र की तरक्की और खुशहाली की प्रथम सीड़ी उस क्षेत्र के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर निर्भर रहती है वहां के जनप्रतिनिधि भी इसमें अहम भूमिका अदा करते हैं। बासौदा जनपद में जनप्रतिनिधि द्वारा तो हितग्राही को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिये दिन रात एक कर दिया जाता है लेकिन वहां अधिकारियों की कार्यप्रणाली जब निम्न स्तर की होती हो तो क्षेत्र की तरक्की कैसे संभव हो सकती है। विगत माह बासौदा जनपद में जनपद सीईओ का प्रभार संभालते ही जनपद सीईओ संजय अग्रवाल की दूषित कार्यप्रणाली योजनाओं को पलीता लगाने में कम नहीं बैठ रही। इनके द्वारा सचिवों, जीआरएस सहित अन्य कर्मचारियों के साथ अशोभनीय भाषा और अभद्र व्यवहार के चलते जमीनी स्तर के कर्मचारी शोषण का शिकार हो रहे हैं। जनपद सीईओ की निम्न स्तर की कार्यप्रणाली शहर भर में एक वीडियो वायरल होने पर सामने आई जहां उनके द्वारा एक कर्मचारी के साथ अशोभनीय और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। 

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