प्रदेश की सबसे बड़ी मंडी में लहसुन के भाव पर हंगामा

On Date : 14 April, 2018, 9:48 PM
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मुख्यमंत्री भावांतर योजना से नाराज किसानों ने शनिवार को प्रदेश की सबसे बडी देवी अहिल्याबाई होल्कर फल एवं सब्जी मंडी में जमकर हंगामा मचाया। किसानो के हंगामें का दूसरा दिन है बावजूद इसके मंडी प्रशासन की ओर से उन्हें कोई माकूल जवाब नहीं दिया गया। लिहाजा, शनिवार को भी किसानों ने लहसुन खरीदी के दौरान हंगामा मचा दिया और मंडी प्रशासन व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इंदौर।  किसानों की शिकायत है कि भावांतर योजना के तहत् उनसे लहसुन के दामों को लेकर तमाम वादे किए गए लेकिन बीते दो दिनों से किसानों को 1400 रुपए से कम के हिसाब से दाम मिल रहे है और ये ही वजह है कि सभी किसानों ने लामबंद होकर मंडी प्रशासन के खिलाफ विरोध किया है लेकिन मंडी प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी किसी भी प्रकार से उनकी समस्या का निराकरण नही कर रहे है। हालांकि लहसुन खरीदी को लेकर प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देने की घोषणा ही कर दी थी बावजूद इसके शनिवार को किसान जब अपनी उपज बेचने पहुंचे तो उन्हें बेहतर दाम नही मिला तो किसानों ने मंडी गेट पर ही धरना दे दिया वही कुछ किसान मंडी गेट नंबर 1 पर लेट गए और किसानों ने पूरी मंडी के कामकाज को बंद करवा दिया।
इस दौरान मामूली सी मारपीट की सूचना भी मिली है। महू तहसील के किसान ने बताया कि 12 से 14 सौ रुपए के दाम किसानों को दिए जा रहे है जो उचित नहीं है ऐसे में किसानो ने मंडी को बंद रखने का फेसला लिया है। वही किसानों ने मुख्यमंत्री की भावांतर भुगतान योजना का भी विरोध किया। इधर, मामले की सूचना पुलिस को लगी तो मौके पर पहुंची पुलिस ने किसानों को समझाइसग देने की कोशिश की लेकिन उपज का दाम सही नही मिलने के चलते किसानों को आक्रोश जारी रहा। हालांकि मंडी प्रशासन का विवाद के संबंध में कहना है कि लहसुन की गुणवत्ता के आधार पर ही मूल्य तय किया जा रहा है ऐसे में किसान ऊंचे दामों की मांग कर रहे है।
उट हेल्पलाइन की शिकायतों का निराकरण नहीं, लगी फटकार
इंदौर। सीएम हेल्पलाइन पर सहकारिता संबंधी शिकायतों के निराकरण के प्रति सहकारिता विभाग के अफसरों की लापरवाही पर राज्य सहकारिता आयुक्त रेणु पंत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अफसरों को फटकार लगाई है। गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं संबंधी प्रदेश में सर्वाधिक शिकायतें इंदौर से हैं, क्योंकि यहां सर्वाधिक गृह निर्माण संस्थाएं हैं और जमीन संबंधी कामकाज भी बड़े स्तर पर है। रेणु पंत ने हाल ही प्रदेश के सहकारिता अफसरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सहकारिता विभाग के कामकाज को लेकर विभिन्न विषयों पर सिलसिलेवार चर्चा की। सीएम हेल्पलाइन पर की गईं शिकायतों की समीक्षा में पाया कि कई का निराकरण ही नहीं हुआ है। इस पर आयुक्त ने अफसरों को कहा कि ऐसा लग रहा है कि सहकारिता विभाग के अफसर और कर्मचारी शिकायतों के निराकरण के लिए गंभीर नहीं हैं। सभी का गंभीरता से निराकरण किया जाए। आयुक्त ने सहकारी संस्थाओं के वर्ष 2017-18 के आॅडिट में स्वचलित कम्प्यूटराइजेशन सिस्टम लागू करने के आदेश दिए थे। पता चला कि विभाग के पोर्टल पर 31 मार्च तक सभी जानकारी दर्ज करने के निर्देश थे, किंतु 14 जिलों से एक भी प्रविष्टि नहीं हुई।

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