डाक्टर न होने से पीएम के के लिए 5 घंटे किया इंतजार

On Date : 25 August, 2017, 9:52 PM
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गैरतगंज अस्पताल में भटकते रहे परिजन
गैरतगंज। मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल में शुक्रवार की सुबह दो लाशें पीएम के इंतजार में लगभग पांच घंटे तक रखीं रहीं। अस्पताल में डॉक्टर न होने के कारण पीएम न हो पाने के चलते मृतकों के परिजन भटकते रहे। बाद में लोगों ने इसकी सूचना जिले के अधिकारियों को दी तब जाकर बेगमगंज से आए डाक्टर ने पीएम किया। डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे गैरतगंज अस्पताल में पदस्थ दो डॉक्टरों के न होने से ऐंसे हालात बने।
 
तहसील गैरतगंज के भानपुर गढ़ी में एक दिन पहले एक महिला हेमलता विश्वकर्मा पत्नि प्रमोद विश्वकर्मा की फांसी लगाने से एवं ग्राम जुझारपुर में महिला भूरीबाई पत्नी बटनलाल आदिवासी की सर्पदंश से मौत हो गईं थीं। दोनों की ही लाशों को शुक्रवार को अल सुबह गैरतगंज अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था। परंतु अस्पताल में पदस्थ दो डॉक्टरों में से एक के शासकीय मीटिंग गैरतगंज से बाहर होने एवं एक डाक्टर के बीमार होने से छुट्टी पर होने से लाशें लेकर आए दोनों मृतकों के परिजन घंटों अस्पताल में पीएम के इंतजार में भटकते रहे। 
 
बाद में इसकी जानकारी मिलने पर मीडिया कर्मी एवं सभ्रांत नागरिक अस्पताल पहुंच गए तथा उन्होंने पीएम होने में आ रही इस समस्या की जानकारी कलेक्टर व सीएमएचओ सहित अन्य जिलाधिकारियों को दी। तथा बाद में लगभग पांच घंटे बाद जिला स्तर से पहल होने पर बेगमगंज से एक डॉक्टर नीलेश चौरसिया को पीएम के लिए भेजा गया तब जाकर कहीं लाशों का पीएम हो सका। मौके पर मौजूद तथा ग्रामीणों के साथ अस्पताल आए जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि रामगोपाल पोर्ते ने बताया कि गैरतगंज अस्पताल में पीएम के लिए आए मृतकों के परिजनों को काफी देर परेशान होना पड़ा। सीएमएचओ डा. शशि ठाकुर से इस संबंध में बात किए जाने पर उनका कहना है कि गैरतगंज अस्पताल में 6 पदों के विरुद्ध केवल 2 ही डॉक्टर पदस्थ हैं तथा शुक्रवार को दोनों ही डॉक्टर उपस्थित नहीं रह पाए जिसके कारण यह स्थिति बनी। वैकल्पिक रूप से व्यवस्था कर पीएम करा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर डॉक्टरों के पद भरे जाने हेतु वरिष्ठ कार्यालय को लिखा गया है।
 
ओपीडी में भी परेशान होते रहे मरीज
अस्पताल की ओपीडी में भी शुक्रवार को मरीजों को बड़ी संख्या में परेशान होते देखा गया। दूरस्थ क्षेत्रों से आए सैकड़ों मरीज डाक्टर न होने से इंतजार करते करते बैरंग लौट गए। गैरतगंज के सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से डॉक्टरों की कमी की यह समस्या बनी हुई है। यहां अन्य स्टाफ की भी बड़े पैमाने पर कमी है जिसे दूर करने की तरफ स्वास्थ्य विभाग का कोई ध्यान नहीं है।

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