जो आप है, वही हम, कोई चमत्कार नहीं है: नागरजी

On Date : 20 January, 2016, 9:54 PM
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सियरमउ में भागवत कथा सुनने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
प्रदेश टुडे संवाददाता, सिलवानी

जो आप है वही हम है, हम कोई चमत्कार नहीं है। जन कल्याण में पाखंड दिखाबा नहीं होना है, छिपाने का काम नहीं होना चाहिये। कोई भाई बहिन मिले और वह अपना नाम उंचा करने में सिद्धी को नहीं लेना चाहिये। चुपचाप का काम है। राम कृपा पावे कोई। ना तो ऐसे लोगों को बुलाना पड़े, उसी के अन्दर पात्रता दे, उस सीमा को छूते। उसे परमात्मा घट में बैठाकर भेजे। सुखदेव बुलाने से नहीं आए। वो स्वयं आये, कथा को दिखाबा मत करो, जो सार मिले उसे जीवन में उतारो। धीरे धीरे जिज्ञासा बढ़ाओ, यदि कान पर डालती तो अपनी जिम्मेदारी बढ़ाओ। फिर व्यवहार से ऊपर जाएगा। उक्ताषय के उद्गार समीपस्थ ग्राम सियरमऊ में प्रख्यात नर्मदामाटी के सपूत गौसेवक संत कमलकिशोर नागर जी के श्रीमुख से श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ के तीसरे दिन बुधवार को व्यक्त किये।
उन्होंने कहाकि संसार में एक नियम है। जिसका हद्रय शुद्ध है। एक सांस भी खीचों को तो गुरू ब्रहमाण्ड में भ्रमण करता है। उसके कोई षरीर नहीं। वह इसमें भी अन्दर चला जाता है और बैठ जाता है और समस्या हद्रय शुद्ध नहीं है। यह षुद्ध नहीं पात्र नहीं है। निष्कपट नहीं है वो वापिस आ जाएगी। यदि चला गया तो दुनिया ही बदल जाएगी। कथा गहराई में जा रही है। आप कहते है कोई गुरू मिले और अपना कल्याण कर दे गोविन्द से मिला दे। गुरू वायु है। वह हनुमान है रूद्र अवतार है। सुखदेव सद्गुुरू है, तो यह हवा से चलता है। घट में बैठ जाते है। पंसद आ जाता है तो वह राज करने लगता है अगर दोष दिखा तो अन्दर जाएगा ही नहीं। आप कितना अच्छा पकवान मिष्ठान खा रहे है यदि एक बाल भी आ जाए तो आपकी इच्छा षक्ति ही आपका हाथ रोककर ग्रास (कोरे) को बाहर निकाल देती है। और भूख की इच्छा भी मर जाती है। जिसको अच्छे से खा रहे थे और भूख भी थी। ऐसा ही गुरू का होता है। वो पवनसुत है हवा है गुरू देह रूप् में नहीं होता है। और समझ लो कपट तो नहीं बाल तो नहीं हद्रय में कोई विकार तो नहीं। एक परिवार बड़े प्रेम से रहता है, बड़े भाई जो कर दिया सबे मंजूर। घर अच्छा चला। कोई भी काम हो बड़े से पूछो।
एक दिन ऐसा योग आया, बड़ा घर पर ही था छोटा कोई काम से बाजार गया और जामफल ले आया। और घर आया और बड़े को सौंप दिया। और बच्चों को बांट दो। जामफल बहुत मीठा था। सभी भाईयों के एक तरफ कई भाई के दूसरी तरफ दूसरे भाई के बच्चे बैठे थे। हाथ सही चला और चीर छोटी बड़ी कट गई। और बड़े भाई के बच्चे को जामफल का बड़ा टुकड़ा चला गया और छोटे भाई के बच्चों को छोटा टुकड़ा चला गया। यही से भेद हो गया। छोटे भाई ने देखकर कहाकि भैया जाम फल बंट गये तो बर्तन और मकान और जमीन भी बांट लो। जो आप कहते थे वह सब मानते थे आज भेद कहां से आया। यहां उसने सामने देखा तो उसके मान में गांठी आ गई। आप अंतर को समझ नहीं और लुटेरे मजा ले रहे है। श्री नागर जी ने कहाकि एक गांठ ने घर बिगाड़ दिया। जितना घर में सब मिलकर बांट खाओ। यदि अपना जीभ रहा तो गडढ़ा कर घी डालते है और काका बाबा को खान पान में भेद करते है। एक भाई देख रहा तो उसने कह दिया बर्तन बांट लो। ऊपर हजार आंखों वाला देख रहा है। अपने हाथ से लोग गडढ़ा खोद रहे है। फिर कितना भी समझाओं मानने वाला नहीं है। थोड़ा सा सहन नहीं होता है इसमें बहुत सहन करना पड़ता है। सबके घर में सुख षांति बनी रहे, ऐसी कथा उनने और गांठ ना बनना दे।
कथा का आयोजन नाथूराम साहू, लखन, भरत, बसंत साहू द्वारा किया जा रहा है। आज तृतीय दिवस विषाल पांडाल में कोहरे एवं सर्दी में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाव विभोर होकर कथा श्रवण की। आज राजस्व मंत्री ठाकुर रामपालसिंह राजपूत ने कुछ देर श्रवण कर आरती की, एवं आषीर्वाद लिया। कथा का समापन दिवस 24 जनवरी को महाप्रसादी,एवं भण्डारा का आयोजन किया जावेगा। उन्होनें सभी श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर जीवन का परम लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।

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