डिलीवरी के दौरान महिला की मौत

On Date : 13 September, 2017, 12:49 PM
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आक्रोशित परिजनों ने कलेक्टर बंगले पर लगाया जाम
प्रदेश टुडे संवाददाता, मुरैना

चिकित्सकों की लापरवाही के चलते जिला चिकित्सालय में एक महिला की डिलीवरी के दौरान मौत हो गई, जिस पर परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया, और कलेक्टर बंगले पर जाम लगाकर दोषी चिकित्सकों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की गई।
जानकारी के मुताबिक नीतू कुशवाह निवासी जेबरा खेरा हाल को जिला चिकित्सालय में प्रेगनेंसी के दौरान भर्ती कराया गया था। जिसका चिकित्सकों ने सामान्य डिलीवरी न मानकर आॅपरेशन कर दिया। आॅपरेशन के दौरान बच्चा सुरक्षित कर लिया गया लेकिन जच्चा पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिससे उसको लगातार ब्लीडिंग होती रही जिससे महिला की मौत हो गई। परिजन चिकित्सकों को बार-बार बुलाते रहे न तो कोई चिकित्सक उसकी सुध लेने आया आई और न ही कोई नर्स वहां पहुंची। चिकित्सक अपने रूम में सोते रहे। उधर महिला की मौत हो गई। सुबह होते ही यह खबर आग की तरह फैल गई। जिस पर  समाज के लोग और कुछ राजनेता भी इस मामले को लेकर जिला चिकित्सालय पहुंचे। वहीं किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष गिर्राज डण्डौतिया अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए और उन्होंने चिकित्सा अधिकारियों को फोन लगाया फिर भी कोई सहायता के लिए नहीं आया। चिकित्सकों के इस गैर जिम्मेदाराना रवैए से आक्रोशित परिजनों ने नीतू के शव को कलेक्टर बंगले पर रखकर चक्का जाम कर दिया। सुबह 6 बजे से लेकर 10 बजे तक यह मामला गर्माया रहा, इस दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मामले को लेकर चौकन्ना बने रहे। एसडीएम प्रदीप तोमर ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और कार्रवाई तथा मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया। तब कही जाकर मामला सुलटा। समाज के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि आश्वासन के मुताबिक कार्रवाई न हुई तो आगे फिर आंदोलन किया जाएगा।

एम्बुलेंस चालक की जिद से मासूम की मौत
मुरैना।
  सरकार व मंत्री गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज व सुविधाएं देने की बात तो कर रहे हैं, लेकिन उनकी घोषणाओं पर कितना अमल हो रहा है, इसका ज्वलंत उदाहरण जिला अस्पताल में उस समय देखने को मिला, जब एंबुलेंस चालक की जिद के कारण एक मासूम बच्चे की जान चली गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार घंसू पुत्र जण्डेल सिंह परमार 12 वर्ष निवासी नंदे का पुरा को गंभीर बुखार होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लगभग 25 से 30 मिनट इलाज चला उसके बाद इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक द्वारा उसे ग्वालियर के लिये रैफर कर दिया गया। बताया जाता है कि घंसू के साथ उसकी मां मधु परमार अकेली थी और उसके पास पैसे भी नहीं थे। जब वह बच्चे को लेकर एंबुलेंस पर पहुंची तो एंबुलेंस चालक मानवता को शर्मसार करते हुए 850 रुपए शुल्क लेने पर अड़ गया और कहा कि पैसे मिलने के बाद ही गाड़ी ले जाएगा। इधर घंसू की हालत बिगड़ती जा रही थी। इस बीच कुछ लोगों ने डॉ संजीव बांदिल को मामले से अवगत कराया तो उन्होंने 108 को फोन कर दिया, लेकिन जब तक 108 पहुंची, तब तक घंसू की मौत हो चुकी थी। समय पर इलाज न मिलने व पैसे न होने के कारण एक बालक की जान चली गई।

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