नई दिल्ली : मन में कुछ कर दिखाने की इच्छा है तो कोई भी परेशानी आपका रास्ता नहीं रोक सकती. गुजरात बोर्ड की 10वीं कक्षा में पढ़ने वाला शिवम इसकी जीती जागती मिसाल बन गया है. शिवम के न तो हाथ हैं और न ही एक पैर. अपनी इस हालत से हार मानने की जगह शिवम ने खुद को और मजबूत किया और विकलांगता को खुद पर हावी नहीं होने दिया. अपनी मेहनत और लगन से शिवम ने सभी विषय में बेहतरीन नंबर पाते हुए टॉप किया है. 10वीं बोर्ड में शिवम को 98.53 प्रतिशत अंक मिले हैं.

गुजरात सेकेंडरी एंड हायर सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड (GSEB) की 10वीं कक्षा के रिजल्ट सोमवार को घोषित किए गए. इस परीक्षा में करीब 10 लाख स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. पास होने वाले छात्रों में से 6015 दिव्यांग विद्यार्थी थे. छोटी उम्र में हाथ और एक पैर खो देने वाला शिवम इस लिस्ट में टॉप पर है.

पतंग उड़ाने के दौरान हादसा और खो दिए हाथ पैर
वडोदरा शहर के बरानपुरा इलाके के विजयनगर निवासी सोलंकी परिवार का बेटा शिवम दूसरों के लिए मिसाल बन गया है. शिवम जब 11 साल का था तब एक दिन वो छत पर पतंग उड़ाने के लिए गया. इस दौरान वो पास ही लटक रहे एक बिजली के तार की चपेट में आ गया. करंट के कारण शिवम के हाथ-पैर बुरी तरह झुलस गए. उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों को उसके दोनों हाथ और एक पैर काटना पड़ा.

माता-पिता ने दी हिम्मत
हादसे के बाद सफाई कर्मचारी के रूप में काम करने वाले शिवम के पिता और उसकी गृहणी मां के पास अपने बेटे की स्थिति को स्वीकारने के अलावा कोई रास्ता नहीं था. अपना दुख व्यक्त करने और उसकी कमियों पर ध्यान देने की जगह वे शिवम की हिम्मत बनें. शिवम की मां ने उसे बचे हुए हाथ के हिस्से में पट्टी बांध उसमें पैन फंसाकर लिखना सिखाया. धीरे-धीरे शिवम की इस पर पकड़ बनती गई. माता-पिता की हिम्मत का असर शिवम पर भी हुआ और उसने पढ़ाई में अच्छा परफॉर्म करना शुरू कर दिया.

शिवम को दसवीं में मिली सफलता पर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है. उनके घर में जश्न सा माहौल है. वहीं अपनी खुशी जाहिर करते हुए शिवम ने बताया कि वो बड़े होकर डॉक्टर बनना चाहता है, ताकि वो दूसरों की मदद कर सके.