नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने 28 मई को कुछ लोकसभा एवं विधानसभा सीटों पर हुए उप - चुनाव के दौरान वोटर वेरिफायेबल पेपर ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों में बड़े पैमाने पर खराबी सामने आने के मामले में गुरुवार को जांच शुरू की.  आयोग के सूत्रों ने बताया कि उसने उत्तर प्रदेश के कैराना और महाराष्ट्र के भंडारा - गोंदिया में अपनी दो टीमें भेजी हैं ताकि वीवीपीएटी मशीनों में खराबी और खामी के ज्यादा मामले सामने आने के कारणों का पता लगाया जा सके. इस मामले में रिपोर्ट पांच जून तक सौंपे जाने की संभावना है.

वीवीपीएटी और ईवीएम में खराबी के कारण मतदान में घंटों की देरी होने के बाद भंडारा - गोंदिया के पांच विधानसभा क्षेत्रों के 49 मतदान केंद्रों और कैराना के 74 मतदान केंद्रों पर फिर से मतदान के आदेश दिए गए थे. सूत्रों ने बताया कि इन टीमों में ईसीआईएल और बीईएल के सदस्य भी होंगे. ईसीआईएल और बीईएल दो ऐसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं जो ईवीएम एवं वीवीपीएटी का निर्माण करते हैं.

कोई मतदाता जब वोट डालता है तो वीवीपीएटी मशीनों से निकलने वाली पर्ची से वह देख सकता है कि उसका मत किसे पड़ा है. यह पर्ची सात सेकंड तक दिखाई देती है और फिर एक बक्से में जा गिरती है. मतदाता इस पर्ची को अपने साथ नहीं ले जा सकता.

हर विधानसभा सीट में किसी एक मतदान केंद्र पर ईवीएम से पड़े वोटों और वीवीपीएटी से निकली पर्चियों का मिलान किया जाता है. ऐसे मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाने की मांग की जा रही है जहां ईवीएम से पड़े वोटों का मिलान वीवीपीएटी की पर्चियों से किया जा सके.