दोपहर सवा 2 बजे की घटना, इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल ने की मौत की पुष्टि
बेटी के स्टडी रूम में गोली की आवाज सुन स्तब्ध रह गए घर में मौजूद लोग

कांग्रेस ने भय्यू महाराज की मौत पर आशंका जताई, CBI जांच की मांग
पूरे देश में घटनाक्रम की खबर मिलते ही हर कोई भौचक्का

इंदौर/भोपाल,ब्यूरो
राष्टÑसंत भय्यू जी महाराज ने मंगलवार खुद को गोली मार ली। उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अभी तक घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है। बड़ी बात यह है कि घटना से महज 20 मिनट पहले ही भय्यू जी महाराज ने ट्वीट कर मासिक शिवरात्रि की बधाई दी थी। बताया जा रहा है कि भैय्यू जी महाराज ने बंद कमरे में खुद को गोली मारी। आवाज सुनकर परिजन कमरे में पहुंचे जहां वे घायल अवस्था में थे। उन्हें तुरंत बांम्बे अस्तपाल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। भय्यू जी महाराज के आकस्मिक निधन से पूरे देश स्तब्ध रह गया। घटना के तुरंत बाद प्रदेश के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए है। मध्य प्रदेश में भय्यू जी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। कुछ वक्त पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा दिया था।  1968 को जन्मे भय्यू महाराज का असली नाम उदय सिंह देखमुख है। वह कपड़ों के एक ब्रांड के लिए कभी मॉडलिंग भी कर चुके हैं।  भय्यू महाराज का देश के दिग्गज राजनेताओं से संपर्क थे। हालांकि वह शुजालपुर के जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। भय्यू जी महाराज तब चर्चा में आए थे जब 2011 में अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने उन्हें अपना दूत बनाकर भेजा था। इसी के बाद ही अन्ना ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था। वहीं पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे। उस उपवास को तुड़वाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज को आमंत्रित किया था।  उनका सदगुरु दत्त धार्मिक ट्रस्ट नाम का ट्रस्ट भी चलता है। अपने ट्रस्ट के जरिए वह स्कॉलरशिप बांटते थे। कैदियों के बच्चों को पढ़ाते थे। और किसानों को खाद-बीज मुफ्त बांटते थे।

सुसाइड नोट मिला?
घटना स्थल से एक छोटी डायरी मिली है, जिसमें अंग्रेजी में चार पांच लाइनें लिखीं हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक डायरी में लिखा है कि मेरी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने लिखा कई दिनों से जिंदगी के तनाव से परेशान था परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कोई होना चाहिए। परिजनों के मुताबिक छोटी सी डायरी भय्यू महाराज हमेशा अपने पास रखते थे। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि डायरी में हैंड राइटिंग किसकी है।

मौत से 15 मिनट पहले ट्विटर पर रहे सक्रिय,दी शिवरात्रि की शुभकामनाएं
1.24 से 1.27 तक तीन ट्वीट में दिया संदेश
आज मासिक शिवरात्रि  है। यह प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। हिन्दू धर्म में इस शिवरात्रि का भी बहुत महत्त्व है। ‘शिवरात्रि‘ भगवान शिव और शक्ति के अभिसरण का विशेष पर्व है। धार्मिक मान्यता है कि ‘मासिक शिवरात्रि’ के दिन व्रत आदि करने से भगवान शिव की विशेष कृपा द्वारा कोई भी मुश्किल और असम्भव कार्य पूरे किये जा सकते हैं। ‘अमांत पंचांग’ के अनुसार माघ मास की ‘मासिक शिवरात्रि’ को ‘महाशिवरात्रि’ कहते हैं। 'मासिक शिवरात्रि' को 'महाशिवरात्रि' कहते हैं। दोनों पंचांगों में यह चन्द्र मास की नामाकरण प्रथा है, जो इसे अलग-अलग करती है। मै सभी भक्तगणों को इस पवन दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं।
12.13 बजे
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई। भगवान उन्हें दीर्घायु प्रदान करे और वे देश के हर व्यक्ति के हित में लगातार काम करते रहें।
12.58 बजे
सिंगरेडी नारायण रेड्डी पद्मश्री ज्ञानपीठ पुरस्कार,पद्म भूषण ज्ञानपीठपुरस्कार से सम्मानित तेलुगु भाषा के प्रख्यात कवि थे। वे पांच दशकों से भी अधिक समय तक काव्य रचना में लगे रहे। आज उनकी पुण्यतिथि पर इस महान लेखक को विनम्र अभिवादन।
1.16 बजे
योग एवं तंत्र के प्रकांड विद्वान पद्म विभूषण से सम्मानित महान दार्शनिक गोपीनाथ कविराज जी के पुण्यतिथि पर शत शत नमन।
लेकिन....मनस्थिति का अंदाज लगाना मुश्किल
गौरतलब है कि भय्यू जी महाराज के ट्विटर हैंडिल से किए गए ट्वीट रुटीन हैं। आमतौर पर देखा जाता है कि बड़ी हस्तियों के ट्वीट उनकी टीम ही हैंडिल करती है। ऐसे में इन ट्वीट के आधार पर ये अनुमान नहीं लगाया जा कि ये ट्वीट खुद भय्यू जी महाराज ने किए हों और उनकी मनस्थिति इस हादसे से पहले
ठीक हो।

दूसरी शादी के रिसेप्शन में पहने थे काले कपड़े, भक्तों को था ऐतराज
भय्यू महाराज की दूसरी शादी बेहद सुर्खियों में रही। अपनी महिला मित्र डॉ. आयुषी शर्मा के साथ भय्यू महाराज ने जैसे ही विवाह रचाने की सार्वजनिक घोषणा की तो हर कोई हतप्रद रह गया था। अपनी बड़ी बहन जिन्हें भय्यू महाराज सम्मान से अक्का बोला करते थे, उन्हें जब शादी के बारे में जानकारी दी थी तो बड़ी बहन ने छोटे भाई के मनोभाव को समझते हुए सहर्ष सहमति दे दी थी। सबसे बड़ा सवाल भय्यू महाराज के सामने उनकी बिटिया कुहू का था कि वे उसे मानसिक रूप से कैसे सहमत करवाएंगे। परिवार के अन्य लोगों ने यह दायित्व संभाला और भय्यू महाराज परिणय बंधन में बंध गए। इंदौर के एक मैरिज गार्डन में हुए 30 अप्रैल 2017 को विवाह समारोह के आयोजन में भय्यू महाराज के परिधान भी चर्चा का विषय रहे। उन्होंने काले कपड़ों पर सफेद कोट पहन रखा था। अधिकांश भक्तों ने उनके इस परिधान पर समारोह के दौरान ही ऐतराज जताया था, लेकिन गुरु परंपरा के चलते कोई भी व्यक्ति इस विषय में खुलकर नहीं बोल पाया।

3 माह पहले पिता बने थे भय्यू महाराज, बड़ी बेटी से करते थे बेहद प्यार
दूसरी पत्नी आयुषी  के मां बनने के बाद से बढ़ा था टकराव, बड़ी बिटिया कुहू को परेशान देख थे विचलित

 

इंदौर, ब्यूरो। अपनी दूसरी शादी के बाद से भय्यू महाराज अपने भक्तजनों को कभी भी स्थिर नजर नहीं आए। सार्वजनिक कार्यक्रमों से उन्होंने लगभग तौबा कर ली थी, लेकिन अपने आश्रम में नियमित आने वाले भक्तों से उनकी मुलाकात होती रही। भय्यू महाराज अपनी शादी के बाद से उतने खुश नहीं थे, जितना कि वे अक्सर मीडिया की सुर्खियों में नजर आते थे। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि उनकी दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी शर्मा विवाह के बाद से ही भय्यू महाराज के निजी और सार्वजनिक जीवन में काफी हस्तक्षेप किया करती थीं, जिसके कारण कुछ ही दिनों में आश्रम में काम करने वाले पुराने भक्तों और परिजनों का डॉ. आयुषी से विवाद होने लगा। पिछले साल 30 अप्रैल को भय्यू महाराज ने अपनी शादी की आधिकारिक घोषणा की थी, लेकिन बताया गया है कि उनकी शादी डेढ़ माह पूर्व ही हो गई थी। हाल ही में लगभग तीन माह पहले एक बार पुन: बिटिया हुई थी। इस खबर को आश्रम के कुछ चुनिंदा लोग और परिजनों से ही शेयर किया गया था। यह बहुत ही चौंकाने वाला तथ्य रहा कि भय्यू महाराज ने अपनी दूसरी शादी के बाद पिता बनने की खबर सार्वजनिक नहीं की थी। सूत्र बताते हैं कि इसी तरह की निजी बातों को लेकर दूसरी पत्नी और भय्यू महाराज में लगातार विवाद चलता रहा। जिसके फलस्वरूप भय्यू महाराज ने अपनी पत्नी को स्प्रिंग वेली फेस-2 में एक फ्लैट में शिफ्ट कर दिया था। बाद में भय्यू महाराज ने अपने विजय नगर स्थित आवास में नए सिरे से रिनोवेशन का काम शुरू कर दिया था। कहा जा रहा था कि बड़ी बिटिया कुहु जब-जब पूणे से घर लौटती थी, तब दूसरी पत्नी आयुषी और कुहु में टकराव होता रहता था। इस घटनाक्रम को देखकर भय्यू महाराज विचलित रहते थे। आश्रम से जुड़े एक विश्वस्त सहयोगी ने बताया कि कई बार आयुषी और कुहु के बीच मध्यस्थता के दौरान अप्रिय घटनाएं भी हुई थीं। यह परिस्थितियां निरंतर अनियंत्रित होती जा रही थीं। भय्यू महाराज अपनी बेटी कुहु से बेहद प्यार करते थे। बताया जा रहा है कि लगातार बढ़ते पारिवारिक कलह के कारण उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।