बरेली : यूपी में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की स्थिति पूरी तरह से बेहाल है. स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर अंगुली उठाती हुई एक घटना बरेली से सामने आई है. सरकार भले ही भ्रष्‍टाचार और घूसखोरी पर लगाम लगाने की बात कर रही हो लेकिन बरेली में एक दस साल के बच्‍चे की मौत महज इसलिए हो गई क्‍योंकि डॉक्‍टरों से उसके पिता से उसके इलाज के लिए 10 हजार रुपये की घूस मांगी थी. पिता इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ था. ऐसे में डॉक्‍टरों ने भी इलाज से मना कर दिया. ऐसे में ठीक समय पर इलाज न मिल पाने से उसकी मौत हो गई.

बदायूं के उघैती थाना क्षेत्र के गांव बाला किशनपुर का रहने वाले धर्मपाल के बेटे को तेज बुखार था. वह तेज बुखर से तड़प रहे अपने बेटे को सबसे पहले बदायूं के ही जिला अस्पताल इलाज के लिए ले गया. वहां डॉक्टरों ने हालत अधिक गंभीर देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए बरेली के जिला अस्पताल रेफर कर दिया. धर्मपाल का आरोप है कि बरेली जिला अस्पताल पहुंचने पर उनके साथ डॉक्टरों ने पहले तो बदसलूकी की. इसके बाद डॉक्‍टर और नर्स ने उससे उसके बेटे के इलाज के एवज में घूस की मांग कर दी.

आरोप है कि डॉक्‍टर ने उससे दस हजार रुपये और नर्स ने उससे पांच सौ रुपये मांगे. गरीब होने के कारण धर्मपाल इतने रुपये देने में असमर्थ था तो उसने डॉक्‍टरों से मना कर दिया. ऐसे में डॉक्‍टरों ने बच्‍चे का इलाज करने की बजाय उसका इलाज करने से मना कर दिया. इसके बाद बच्‍चे दीनदयाल को इलाज के लिए लखनऊ रेफर कर दिया. लेकिन बरेली के जिला अस्‍पताल की ओर  से उसे कोई भी वाहन और एंबुलेंस उपलब्‍ध नहीं कराया गया. एंबुलेंस उपलब्‍ध कराने की बात पर जो एंबुलेंस उसे उपलब्‍ध कराई गई वो करीब पांच घंटे बाद वहां पहुंची. लेकिन तब तक दीनदयाल की तड़प-तड़प कर मौत हो गई.

बेटे की मौत से पिता बिलकुल टूट गया और बेटे का शव छोड़कर रात में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इंसाफ की गुहार लगाने के लिए लखनऊ निकल पड़ा. लेकिन लखनऊ में सीएम योगी से उसकी मुलाकात नहीं हो सकी और बरेली पहुंचकर उसने जिला अस्पताल के डॉक्टर और नर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है. इस मामले में एसपी सिटी अभिनन्दन सिंह का कहना है कि बच्चे के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया है. धर्मपाल की तहरीर पर जिला अस्पताल के डॉक्टर और नर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है. उनका कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.