नई दिल्ली: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने टाटा संस के खिलाफ साइरस मिस्त्री की याचिका को खारिज कर दिया है. ट्रिब्यूनल ने कहा कि टाटा संस के निदेशक मंडल और उसके सदस्यों को साइरस मिस्त्री पर भरोसा नहीं रह गया था. मिस्त्री ने खुद को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाने के फैसले को चुनौती देते हुए एनसीएलटी में याचिका दाखिल की थी. मिस्त्री के लिए ये बहुत बड़ा झटका है.

साइरस मिस्त्री को 30 साल के लिए टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन उन्हें चार साल बाद ही अपने पद से हटा दिया गया. ऐसा माना जाता है कि टाटा संस में 66 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्टों को समूह कंपनियों की ओर से जाने वाले लाभांश में कमी, मिस्त्री की अचानक निकासी की एक वजह थी।

मिस्त्री के बाद रतन टाटा ने अंतरिम चेयरमैन के रूप में समूह की बागडोर एक बार फिर संभाली. इसके कुछ दिन बाद लंबे समय तक टीसीएस के प्रमुख रहे एन चंद्रशेखर को टाटा समूह का चेयरमैन बनाया गया.

एनसीएलटी का यह फैसला टाटा संस और साइरस मिस्त्री के बीच 20 महीने तक कड़वे कानूनी जंग के बाद आया है. मिस्त्री की ओर से दिसंबर 2016 में दायर याचिका में टाटा ग्रुप की ऑपरेटिंग कंपनियों में रतन टाटा और टाटा ट्रस्ट्स के एन ए सूनावाला के हस्तक्षेप के कारण टाटा संस में गवर्नेंस कमजोर होने और बिजनस को लेकर गलत फैसले किए जाने का भी आरोप लगाया था. हालांकि अब मिस्त्री नेशनल कंपनी लॉ अपेलिट ट्रिब्यूनल में जा सकते हैं.