नई दिल्ली: जनता दल यूनाइटेट (जेडीयू) से अलग होकर लोकतांत्रिक जनता दल बनाने वाले शरद यादव आजकल अपनी जन्मभूमि मध्य प्रदेश में सक्रिय है. उनकी कोशिश है कि मध्य प्रदेश के छोटे छोटे दलों को एकजुट करके एक गैर-बीजेपी महागठबंधन बनाया जाए. उनकी इस पहल पर कुछ छोटे दलों ने दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन फिलहाल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे दल इससे अभी तक दूर ही हैं. इसके अलावा राज्य में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस पहल के बारे में कुछ नहीं कहा है. ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस बार शरद यादव का 'तीर' निशाने पर लगेगा.

बिहार की राजनीति में काफी दखल रखने वाले शरद यादव बीते कई महीनों से मध्य प्रदेश पर खासा जोर दे रहे हैं. समाजवादी नेता मामा बालेश्वर दयाल की कर्मभूमि बामनिया आश्रम में शरद यादव अकसर आते रहे हैं. बामनिया आश्रम को ही आधार बनाकर वो मध्य प्रदेश में अपनी पैठ बनाना चाहते हैं. फिलहाल उनकी कोशिश छोटे-छोटे दलों के अपने साथ जोड़ने की है.

उनके इस प्रयास को कुछ कामयाबी भी मिलती हुई दिख रही है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ ही राज्य में सीमित असर रखने वाले बहुजन संघर्ष दल, एकीकृत गोंडवाना दल और भारतीय समानता दल उनके साथ आ गए हैं. इसके अलावा वो विभिन्न हिस्सों में प्रभाव रखने वाले लोगों को भी अपने साथ जोड़ रहे हैं.

राज्य में गैर भाजपाई दलों को एकजुट करने और नवगठित लोकतांत्रिक जनता दल के विस्तार के लिए भोपाल में दो अगस्त को एक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. इस सम्मेलन को लोक क्रांति सम्मेलन का नाम दिया गया है और इस दौरान मध्य प्रदेश तथा छत्तीगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनावों के बारे में खासतौर से मंथन किया जाएगा.

इस पूरी कोशिश में सबसे बड़ी पेंच ये है कि अभी तक सपा, बसपा के साथ ही मुख्य विपक्ष दल कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं. जानकार कह रहे हैं कि राज्य में कांग्रेस को साथ लिए बिना कोई महागठबंधन सफल नहीं हो सकता है. अब देखना ये है कि कांग्रेस शरद यादव की इस कोशिश में कितनी दिलचस्पी लेती है.

मध्य प्रदेश में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं. राज्य में मुख्य रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहता है और इस बार बीजेपी से सत्ता हथियाने के लिए कांग्रेस काफी मेहनत कर रही है. इसके अलावा बसपा, सपा और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी भी चुनाव को दिलचस्प बना सकते हैं. ऐसे में यदि गैर-भाजपा दलों का महागठबंधन आकार लेता है तो इसका चुनावी समीकरणों पर गहरा असर होगा. शरद यादव बीते दिनों विवादों के बाद जेडीयू से अगल हो गए थे और उन्होंने राज्य सभा की सदस्यता भी छोड़ दी.