राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष पदाधिकारियों की तीन दिवसीय एक महत्वपूर्ण बैठक गुजरात के सोमनाथ में मंगलवार से शुरू हो रही है. इसमें आरएसएस के सभी प्रांत प्रचारक हिस्सा ले रहे हैं. इसमें प्रचारकों को नए कार्य सौंपने, संगठन के कामकाज आदि पर विचार किया जाएगा.

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, आरएसएस के प्रांत प्रचारक हर साल जुलाई में इस तरह की बैठक करते हैं, जिसमें नागपुर के मुख्यालय में संपन्न संघ शिक्षा वर्ग में हुए निर्णयों को आगे कैसे ले जाएं इस पर विचार किया जाता है. मई में होने वाले संघ शिक्षा वर्ग में कार्यकर्ताओं को ऑफिसर्स ट्रेनिंग दी जाती है.

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में आरएसएस की स्थापना के 100 साल पूरे हो रहे हैं. इसे देखते हुए संघ ने यह निर्णय लिया है कि संगठन को हर जिले के हर तहसील तक पहुंचाया जाएगा और शताब्दी वर्ष मनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी.

संघ ने अपने कामकाज की सुविधा के लिहाज से पूरे देश को 43 प्रांतों में बांट रखा है. इस बैठक में RSS के सभी 43 प्रांत प्रचारकों के अलावा उसके राष्ट्रीय स्तर के कई पदाधिकारी भी शामिल होंगे. उदाहरण के लिए यूपी को सात और महाराष्ट्र को चार प्रांतों में विभाजित किया गया है.

संघ फिलहाल यूपी, एमपी और केरल के सभी तहसीलों तक अपनी पहुंच बना चुका है. सोमनाथ की यह बैठक इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि लोकसभा चुनाव होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि इस बार बीजेपी को फिर से सत्ता में लाने के लिए आरएसएस के कार्यकर्ता चुनाव प्रचार में जोर-शोर से लगेंगे.

आरएसएस और बीजेपी के शीर्ष नेताओं ने सभी सांसदों के कामकाज की समीक्षा भी शुरू कर दी है. आरएसएस के संगठन मंत्रियों से खास तौर से यह कहा गया है कि वे सांसदों के बारे में नियमित रूप से फीडबैक देते रहें.