चंडीगढ़ : राज्य को नशे के चुंगल से मुक्त कराने के लिए पंजाब सरकार लगातार फैसले ले रही है. पहले तो सूबे की कैप्टन सरकार ने नशे के कारोबार में लिप्त लोगों को फांसी की सजा की सिफारिश की थी. इसके बाद राज्य के हर कर्मचारी का डोप टेस्ट कराने का फरमान जारी किया. और अब सरकार ने नशे के आदि लोगों का मुफ्त में इलाज कराने की घोषणा की है. साथ ही सरकार ने पुलिस प्रशासन को नेश के आदि लोगों और उनके परिवार को किसी भी हाल में परेशान नहीं करने के निर्देश दिए हैं.

पंजाब सरकार सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में नशीले पदार्थों की लत से पीड़ित गरीब लोगों का मुफ्त में इलाज करेगी. सिविल सर्जनों, चिकित्सीय अधीक्षक और सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों की उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मुख्य प्रधान सचिव से यह सुनिश्चित करने को कहा कि निशुल्क इलाज के लिए संबंधित डिप्टी आयुक्तों को तत्काल कोष मुहैया कराया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह मुख्यमंत्री राहत कोष से भी इसके लिए कोष मुहैया कराएंगे.

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन से कोष प्राप्त करने के संभव तरीके तलाशने का निर्देश दिया. साथ ही मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पुलिस नशे के आदि लोगों और उनके परिवार को किसी भी सूरत में परेशान नहीं करेगी.

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाएंगे और उनसे प्रार्थना करेंगे कि वे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से पंजाब में नशीली दवाओं और नशीले पदार्थों के प्रवेश को रोकने के लिए केंद्र के प्रयासों में और तेजी लाएं.

बता दें कि अभी हाल ही में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य सरकार के कर्मचारियों का डोप टेस्ट कराने के घोषणा की थी. इस मुद्दे पर विपक्ष ने खूब हंगामा किया. अंत में उन्होंने कहा कि डोप टेस्ट में पॉजेटिक पाए जाने पर किसी भी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी, बल्कि उसका इलाज कराया जाएगा.

अमरिंदर सिंह ने हरियाण के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ के लिए विशेष विकासात्मक निकाय के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि चंडीगढ़ निर्विवादित रूप से पंजाब का हिस्सा है. खट्टर ने सोमवार को केंद्र के समक्ष केंद्र शासित प्रदेश के समेकित विकास के लिए एक वैधानिक, अधिकारिक और समर्पित बोर्ड या प्राधिकरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था. उन्होंने कहा कि वह अलग से पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और चंडीगढ़ संघ शासित प्रदेश प्रशासक वीपी सिंह बादनोर, पंजाब के राज्यपाल के समक्ष यह प्रस्ताव रखेंगे.

पंजाब के मुख्यमंत्री ने एक सामरोह पर इसके संबंध में किए सवाल पर कहा कि चंडीगढ़ निर्विवादित रूप से पंजाब का हिस्सा है. सिंह ने कहा कि उन्होंने खट्टर का प्रस्ताव ठुकरा दिया है.