नई दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मुंबई की तीन कंपनियों के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी के तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस बैंक धोखाधड़ी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को 136 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. पहला मामला टाप वर्थ पाइप्स एंड ट्यूब्स, उसके निदेशक अभय नरेंद्र लोढ़ा, शिशिर शिवाजी हिराय, हर्षराज शांतिलाला बागमर के साथ तत्कालीन एसबीआई अधिकारी सहायक महाप्रबंधक त्यागराजूलनमनामेल्लूरी, उप प्रबंधक विलास नरहर अहिरराव , उपप्रबंधक मधुरा मंगेश सावंत पर बैंक को कथित रूप से 56.81 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए दायर किया गया है.

दूसरा मामला महीप मार्केटिंग और उसके निदेशकों और एसबीआई के तीन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया गया है. इसमें एसबीआई को 49.99 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. तीसरा मामला हर्ष स्टील ट्रेड और उसके निदेशकों तथा एसबीआई के दो तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ दर्ज हुआ है. इसमें एसबीआई को कथित रूप से 30.13 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

इससे पहले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने साल 2017-18 में 1.20 लाख करोड़ के फंसे कर्जों को बट्टे खाते में डाला. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 साल में यह पहली मौका है जब सार्वजनिक बैंकों को बड़ी मात्रा में राशि बट्टे खाते में डालनी पड़ी और घाटा उठाया. वित्त वर्ष 2016-17 में सार्वजनिक बैंकों ने 81,683 करोड़ रुपये मूल्य की गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) को बट्टे खाते में डाला. इसी अवधि में संचयी आधार पर उन्हें 473.72 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ हुआ.

रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार 2017-18 में केवल एसबीआई ने ही 40,196 करोड़ रुपये मूल्य के फंसे कर्ज को बट्टे खाते में डाला. केनरा बैंक ने 8,310 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक ने 7,407 करोड़ रुपये, बैंक आफ बड़ौदा ने 4,948 करोड़ रुपये फंसे कर्ज को बट्टे खाते में डाला. इंडियन ओवरसीज बैंक ने 10,307 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया ने 9,093 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक ने 6,632 करोड़ रुपये व इलाहाबाद बैंक ने 3,648 करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले.