नई दिल्ली: ईरान ने भारत के प्रति नाराजगी जाहिर की है. सामरिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह में वादे के मुताबिक निवेश नहीं करने पर भारत की आलोचना करते हुए ईरान ने कहा कि यदि भारत ईरान से तेल का आयात कम करता है तो उसे मिलने वाले विशेष लाभ खत्म हो सकते हैं. ईरान के उप राजदूत और चार्ज डि अफेयर्स मसूद रजवानियन रहागी ने कहा कि यदि भारत अन्य देशों की तरह ईरान से तेल आयात कम कर सऊदी अरब, रूस, इराक और अमेरिका से आयात करता है तो उसे मिलने वाले विशेष लाभ को ईरान खत्म कर देगा.

उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़ी परियोजनाओं के लिए किए गए निवेश के वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं. यदि चाबहार बंदरगाह में उसका सहयोग और भागीदारी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है तो भारत को इस संबंध में तुरंत जरूरी कदम उठाने चाहिए.

इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है. ईरान ने अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 तक (2017-18 वित्त वर्ष के शुरुआती 10 महीनों में) भारत को 1.84 करोड़ टन कच्चे तेल की आपूर्ति की थी.

मालूम हो कि ईरान के साथ परमाणु समझौते को निरस्त करने के बाद अमेरिका ने भारत और दूसरे देशों को 4 नवंबर तक ईरान से तेल का आयात शून्य करने, नहीं तो प्रतिबंधों का सामना करने को कहा है. इस साल मई में ईरान के साथ परमाणु समझौते को रद्द करने के ऐलान के बाद अमेरिका ने इस खाड़ी देश पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए हैं.

चाबहार बंदरगाह से भारत को होंगे ये 10 फायदे

1. चाबहार बंदरगाह का सीधा फायदा भारत के कारोबारियों को होगा. भारतीय कारोबारी अपना सामान बिना किसी रोक-टोक के सीधे ईरान तक भेज पाएंगे. यहां से भारतीय सामान पहुंचने के बाद इसे अफगानिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों में पहुंचाया जा सकेगा. अब तक इन देशों में जाने के लिए पाकिस्तान रास्ता रोक रहा था.

2. चाबहार बंदरगाह शुरू होने से भारतीय सामानों के एक्सपोर्ट खर्च काफी कम हो जाएगा. एक अनुमान के मुताबिक एक तिहाई कम हो जाएगा. साथ ही समय भी काफी बचेंगे.

3. पाकिस्तान और चीन से रिश्ते अच्छे नहीं होने के चलते भारत एशिया के दूसरे देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश में जुटा है. ईरान और अफगानिस्तान से व्यापार बढ़ने के चलते स्वभाविक है कि इन देशों की भारत से दोस्ती और भी मजबूत होंगे.

4. ओमान की खाड़ी में चाबहार बंदरगाह ने अपनी क्षमता तीन गुना तक बढ़ा ली है. इसके साथ ही पड़ोसी पाकिस्तान में बन रहे ग्वादर बंदरगाह के लिए भी यह चुनौती पेश करता है.

5. 34 करोड़ डॉलर में बनकर तैयार हुए चाबहार बंदरगाह को रेवलूशनरी गार्ड से संबद्ध कंपनी खातम अल-अनबिया (Khatam al-Anbia) ने किया है. यह सरकार की निर्माण परियोजनाओं की ईरान की सबसे बड़ी कंट्रैक्टर कंपनी है. अच्छी बात यह है कि निर्माण कार्य में भारत की सरकारी कंपनी भी शामिल रही.

6. चाबहार बंदरगाह ने ईरान को हिन्द महासागर के और करीब ला दिया है. यह पाकिस्तान की सीमा से मात्र 80 किमी की दूरी पर है. ग्वादर पोर्ट को भी यह चुनौती देता है, जिसे चीनी निवेश के दम पर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बनाया जा रहा है. आशंका जताई जा रही है कि ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल भविष्य में चीन अपने नौसैनिक जहाजों के लिए कर सकता है.

7. इस विस्तार से इस बंदरगाह की क्षमता तीन गुना बढ़ जाएगी और यह पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में निर्माणाधीन गवादर बंदरगाह के लिए एक बड़ी चुनौती होगा.

8. पिछले महीने भारत ने अफगानिस्तान को गेहूं से भरा पहला जहाज इसी बंदरगाह के रास्ते भेजा था.

9. ईरान मध्य एशि‍या में और हिंद महासागर के उत्तरी हिस्से में बसे बाजारों तक आवागमन आसान बनाने के लिए चाबहार पोर्ट को एक ट्रांजिट हब के तौर पर विकसित करने की योजना बना रहा है.

10. पिछले साल भारत ने चाबहार पोर्ट और उससे जुड़े रोड और रेल मार्ग के विकास के लिए 50 करोड़ डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी.