18 वीं शताब्दी में मीडिया ने लोकतंत्र को स्थापित किया। लोकतंत्र के बगैर आधुनिक मीडिया जीवित नहीं रह सकता। आज टीवी चैनलों के बीच टीआरपी बढाने के लिए होड़ मची है और समाचार चैनल सनसनी परोस रहे हैं। यह बात उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एवं राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री श्री वासुदेव देवनानी ने 6 से 8 जुलाई तक आयोजित तीसरी अखिल भारतीय मीडिया एज्युकेटर्स कॉन्फ्रेस में कही। कांफ्रेस के वहीं दूसरी और कांफ्रेस के समापन समारोह के मुख्य अतिथ कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने समापन समारोह में कहा कि  देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है, इस दौर में तकनीक हर जगह हावी है। मीडिया तकनीक का दुरूपयोग देश व दुनिया के लिए चिन्ता का सबब बन रहा है। ऐसे में बतौर मीडिया शिक्षक सभी स्टेक होल्डर्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। संचार क्र ांति ने आम आदमी के जीवन को सहूलियत प्रदान की है लेकिन यह सम्पूर्ण विश्व के लिए कतिपय कारणों से चिन्ता का विषय भी बन गया है। समापन समारोह से पहले आयोजित प्लेनरी सेषन में राजस्थान सरकार की महिला और बाल विकास मंत्री अनिल भदेल ने कहा कि राजस्थान में अभी भी 60 प्रतिशत बाल विवाह होते हैं। एक बाल विवाह कैसे बिच्चयों की जिन्दगी बर्बाद कर देता है यह माता-पिता व दादा-दादियों को सोचना पडेगा। हमारा समाज उल्टा चल रहा है। बेटियों पर कम ध्यान दिया जा रहा है। उनके शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता में नहीं रखा जाता जबकि बेटों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। अगर एक माँ शिक्षति है तो वह बहुत अच्छा समाज बना सकती है।  उदयपुर के अतिरिक्त जिला और सेशन न्यायाधीश महेन्द्र दवे ने बलात्कार के विभिन्न कानूनी और नैतिक पक्षों पर चर्चा की।  

कांफ्रेस में भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली के महानिदेशक के. जी. सुरेश, कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति एम.एस. परमान, गोहाटी विश्वविद्यालय, गोहाटी, आसाम के कुलपति डॉ. मृदुल हजारिके, यूनिसेफ राजस्थान के चीफ फिल्ड आॅफिसर इसाबेल बारडेम, आउट लुक के संपादक रूबेन बेनर्जी, प्रो. शाहीद रसूल, जयश्री जेठवानी, संजय निराला, प्रो. राजन महान, प्रो. के. बी. कोठारी, पत्रकार शेवन्ती नैनन, डॉ. विपुल,  डॉ. उमा शंकर पाण्डे, प्रो. उज्ज्वल चौधरी, प्रो. पुष्पेन्द्र पाल सिंह, माउण्ट आबू पर्वत स्थित प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मीडिया विंग के अध्यक्ष करूणा भाई, सेव द चिल्ड्रन के मीडिया और संचार के महानिदेशक देवेन्द्र टांक सहित देश-विदेश से आये मीडिया शिक्षकों ने टेलीविजन के बदलते रूप, मीडिया के राजनीतिक अर्थशास्त्र, मीडिया शिक्षण, वैकिल्पक मीडिया के प्रभाव, सिनेमा, विकास और मीडिया, सोशल मीडिया आदि विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस तीन दिवसीय कांफ्रेस के दौरान पद्मभूषण कोमल कोठारी की स्मृति में जोधपुर स्थित रूपायन संस्थान और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से नाहरगढ किले पर राजस्थान के लोक कलाकारों की प्रस्तुति हुई। साथ ही पूर्वोत्र के संगीत आईकान भूपेन हजारिका को याद करते हुए मुम्बई के बनयन ट्री बैंड ने गीतो की प्रस्तुति दी। साथ ही असम के  जाम्बली बैंड ने युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए संगीत की मनमोहहक प्रस्तुतियां दी। कांफ्रेस में देष के 19 राज्यों के करीब 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें करीब 160 प्रतिभागियों ने शोध पत्र कांफ्रेस के दौरान आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों में पढे।