इंफाल : मणिपुर के तेंगनौपाल जिले में भारत - म्यामां सीमा पर कथित तौर पर एक खंभा हटाने को लेकर तनाव के बीच मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने आज कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सीमा 1970 में अपने निर्माण के बाद से अनछुई और अप्रभावित है।
 

मुख्यमंत्री ने आज सुबह संवाददाताओं से कहा कि भारत और म्यामां को विभाजित करने वाली सीमा का निर्धारण दोनों देशों के बीच 1967 में किए गए एक समझौते के बाद हुआ था। उन्होंने कहा कि लोगों की आशंका के मद्देनजर राज्य सरकार ने केंद्र को एक पत्र लिख कर 18 जुलाई को क्षेत्र का दौरा कर यह जांच करने को कहा है कि तेंगनौपाल जिले में कवाथा खुनोउ स्थित खंभा नंबर 81 समझौते के मुताबिक वास्तविक जगह पर है या नहीं।
 

गौरतलब है कि पिछले महीने जिला आयुक्त तोम्बीकांत ने सीमावर्ती क्षेत्र का दौरा करने के बाद दावा किया था कि खंभा नंबर 81 को हटा कर भारतीय सरजमीं के तीन किमी अंदर कर दिया गया है। उनके दावे का स्थानीय लोगों , कई समाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी समर्थन किया।मणिुपर कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार से रविवार को इस मुद्दे पर अपना रूख स्पष्ट करने को कहा था।
 

वहीं , विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों पर संज्ञान लेते हुए आठ जुलाई को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि आरोप बेबुनियाद हैं।मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह इस विषय पर केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ चर्चा करने के लिए कल दिल्ली में एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने के लिए 25 जून को एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की थी।