जयपुर : महाराष्ट्र के मथाडी आंदोलन से जुडे बाबा आडव ने कहा है कि असंगठित क्षेत्र में श्रमिकों की तादाद बढ़ रही है और राजस्थान के मजदूर संगठनों को भी प्रदेश में मथाडी कानून लागू करने की मांग करनी चाहिए।
 

आडव ने एक कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि राजस्थान के रेलवे, कृषि उपज मंडी, सरकारी गोदामों में काम करने वाले मजदूर अधिकतर देहात से आते है। प्रदेश में डेढ़ से दो करोड़ असंगठित मजदूरों को कोई राहत नहीं मिली है। प्रदेश के मजदूर संगठनों को मथाडी कानून के तहत श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग करनी चाहिए।
 

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मथाडी कानून के तहत मजदूरों को बोनस, भविष्य निधि और नुकसान होने पर राहत प्रदान की जाती है, इसलिये राजस्थान में भी इस कानून को अमल में लाना चाहिए।
 

कार्यशाला में प्रदेश के 15 जिलों से करीब 100 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए राजस्थान के अतिरिक्त श्रम आयुक्त सीबीएस राठौड ने बताया कि श्रमिकों के पंजीकरण के लिये भामाशाह की शर्त हटा ली गई है और अब आधार कार्ड के आधार श्रमिक पंजीकृत हो सकेगे।