नई दिल्ली : दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने गुरुवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की. एक दिन पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजनाथ सिंह से मुलाकात की तथा नौकरशाहों के तबादले और नियुक्तियों संबंधी फैसलों पर अपनी सरकार के दावों से अवगत कराया. बैजल ने राष्ट्रीय राजधानी से जुड़े सेवा तथा अन्य मुद्दे पर सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को राजनाथ सिंह से मुलाकात में जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद सेवा मामले पर उनकी सरकार का अधिकार है.

उधर, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली के उप राज्यपाल द्वारा शहर में कूड़े की समस्या के समाधान के लिए जरूरी कदम नहीं उठाने पर नाखुशी जाहिर की. उप राज्यपाल कार्यालय ने स्वीकार किया था कि कूड़ा प्रबंधन उनके अधिकार क्षेत्र में आता है. न्यायालय ने सुनवाई के दौरान उप राज्यपाल अनिल बैजल को 'सुपरमैन' कहा. न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने एलजी को दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन के मुद्दे में उचित कार्रवाई नहीं करने पर आड़े हाथ लिया और कहा कि वह मामले में महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए और कोई भी निर्देश जारी नहीं किया.

दो दिन पहले पीठ ने पूछा था कि कौन 'कचरे के पहाड़' को हटाने के लिए जिम्मेदार है. जवाब में दिल्ली सरकार और उप राज्यपाल ने गुरुवार को अदालत को बताया कि दिल्ली नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत उप राज्यपाल को अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी करने का अधिकार है.

पीठ ने कहा कि दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा की जाने वाली किसी बैठक में उप राज्यपाल शामिल नहीं होंगे क्योंकि वह कहेंगे कि इसकी अध्यक्षता वह कर रहा है जिसके पास कोई अधिकार नहीं है. अदालत ने कहा, "उप राज्यपाल के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री कौन है?"

पीठ ने कहा, "उप राज्यपाल कार्यालय से कोई भी बैठक में शामिल नहीं हुआ और वह कहते हैं कि मेरे पास शक्ति है. मैं सुपरमैन हूं...यह अपनी जिम्मेदारी दूसरे पर थोपना है. वह कहते हैं कि मैं जिम्मेदार हूं, मैं कुछ भी नहीं करूंगा, लेकिन आप पर आरोप लगेगा."

पीठ ने कहा, 'उप राज्यपाल का शपथ पत्र कहता है कि ठोस कचरा प्रबंधन आपकी जिम्मेदारी है. इसलिए इस मामले में मुख्यमंत्री को न घसीटें.'

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आम आदमी पार्टी ने हस्ताक्षर अभियान चलाया हुआ है. पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग पर मात्र 12 दिनों में 1.53 लाख लोगों ने अपने हस्ताक्षर युक्त पत्र भेजकर अपना समर्थन दिया है. पार्टी का कहना है कि वह इस लड़ाई को बूथ स्तर पर ले जाकर अपने अभियान को मजबूती देगी.

पार्टी ने एक जुलाई को दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग के साथ हस्ताक्षर अभियान 'दिल्ली मांगे अपना हक' शुरू किया था. पार्टी ने इस मुद्दे पर 10 लाख परिवारों का समर्थन हासिल करने का लक्ष्य रखा था.